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जानें क्यों मनाया जाता है दीपावली का पर्व, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

deepawali special

अंधकार को दूर करने वाला त्योहार है दीपावली। एक ऐसा त्योहार जो कि पूरे एक हफ्ते तक मनाया जाता है और जिसकी तैयारियां एक महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। यह त्योहार सभी रिश्तेदार, परिवार व गांव वाले एकजुट होकर मनाते है और चारो तरफ खुशियां बांटते है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

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माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। यह पर्व अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यह दर्शाती है- असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं। विभिन्न जगहों पर रंगोली प्रतियोगिता भी आयोजित होती है और कई मेलो का भी आयोजन होता है।

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दीवाली नेपाल, भारत,श्रीलंका, म्यांमार, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर क्रिसमस द्वीप पर एक सरकारी अवकाश घोषित होता है। दीपावली के पहले दिन धन की पूजा यानि धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। उसके पश्चात छोटी दीवाली यानि नरक चतुर्दशी मनाई जाती है और इस दिन कुल 12 दीपक जलाएं जाते है तथा यमराज व श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।

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छोटी दिवाली के दूसरे दिन बड़ी दीवाली जो कि मुख्य दिवाली के रूप में मनाई जाती है। यह अमावस्या के दिन मनाई जाती है तथा इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
इसके बाद गोवर्द्धन पूजा की जाती है तथा अंत मे मनाया जाता है भाईदूज का त्यौहार जो कि भाई बहनों के प्यार को दर्शाता है। एक हफ्ते का यह त्यौहार चारो तरफ चहल पहल व खुशियो का माहौल बनाये रखता है।

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सभी लोग जो कि नौकरी या अन्य कारणों से अपने घरों से दूर है वो भी इस त्यौहार पर अपने घर जाए व अपने परिवार के साथ हँसी खुशी से यह त्यौहार जरूर मनाएं।
सभी को खुशी के त्यौहार दीपावली की शुभकामनाएं।

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