दर्शकों को पसंद आई मॉडर्न घस्येरी !गीत लगान्दी में पहाड़ी बाजूबंद की झलकियां!

2
1346

उत्तराखंड को देवभूमि ऐसे ही नहीं कहा गया है हर रीति रिवाज हर कार्य का कोई विशेष महत्त्व होता है ,इसका मान सदैव ही पहाड़ की नारियों ने बढ़ाया है,ऐसी कर्मठ और साहसी नारी शायद ही विश्व में कहीं हो,विषम परिस्थतियों का कैसे डटकर मुकाबला किया जाता है ये पहाड़ की नारी बतलाती है।ऐसी ही झलकियां दिखलाता वीडियो गीत लगान्दी यूट्यूब पर रिलीज़ हुआ है। 

यूट्यूब पर इन दिनों एक गीत काफी सुर्ख़ियों में बना हुआ है इसकी विशेषता क्या है वो हम आपको बतलाते हैं। पहाड़ की खूबसूरती तो सबको भाती है लेकिन जो यहाँ जीवन जीता है वही इसे समझ सकता है,और एक नारी से अधिक और कौन समझ सकता है जिसकी सुबह से शाम बस इन्हीं जंगलों में गुजर जाती है और यही उसकी दुनिया होती है।

यह भी पढ़ें : दून में तेरा ठुमका का हुआ विमोचन साथ ही यूट्यूब पर भी लॉन्च !

पहाड़ में अधिकांशतः लोग रोजगार की तलाश में शहरों की तरफ रुख करते हैं और घर की जिम्मेदारी आती है महिलाओं के ऊपर जो घर भी संभालती हैं और पहाड़ के जीवन को भी जीवित रखती हैं,सुबह ही चूल्हा चौका करके निकल पड़ती हैं जंगल की तरफ जो ईंधन और चारे का मुख्य स्रोत है लेकिन जंगल का जीवन इतना आसान नहीं है जितना लोग इसे ट्रैकिंग करके दिखा देते हैं,ये आपके लिए एक या दो दिन का ट्रैकिंग हो सकता है लेकिन इन मेहनती नारियों का तो जीवन ही इस ट्रैक पर कट जाता है।

यह भी पढ़ें: दून में तेरा ठुमका का हुआ विमोचन साथ ही यूट्यूब पर भी लॉन्च !

संघर्ष और कठिन मेहनत के बाद भी इन नारियों के चेहरे पर सदा मुस्कान रहती है  उन्हें प्रकृति से प्रेम है और प्रकृति ही उनके सौंदर्य को संवारती है,इससे इतर एक ऐसा हिस्सा पहाड़ की नारियों का होता है जंगलों ,में गाए जाने वाले गीत जिन्हें हम बाजूबंद कहते हैं,पहाड़ की चढ़ाई पर घास काटती ये घस्येरी और उनके कंठ से निकलते गीतों की ध्वनि चरवाहों या राहगीरों को दूर से ही खींच लाती है ,इससे उनका मनोरंजन भी होता है और उत्तराखंड की जो संस्कृति कहीं जीवित बची है उसको भी जीवित रखती हैं। बाजूबंद गीतों की वो विधा है जो महिला अपनी खुद(याद) में गाती हैं,इसमें कभी दूर धार पार?(पहाड़ के दूसरी तरफ) अपने मायके की याद होती है तो कभी परदेश गए पतिदेव की तो कभी अपने भाई बहनो की याद,ये उनके मन की आवज होती है जो गीत स्वरुप बाहर आती है इसमें करुणा भी होती है तो रुदन भी लेकिन इन सबके बीच सुनने वालों को बस मिलता है तो सुकून।

यह भी पढ़ें: मेरी बजरिया वीडियो हुई रिलीज़ !डांस कॉमेडी का गजब मेल !

वैसे तो कई गीतकारों एवं गायकों ने बाजूबंद को जीवित रखने के लिए गीत लिखे हैं लेकिन इस बार एक युवा लेखक रोहित डुकलान,रविंद्र रावत ने गीत लगान्दी से इसको फिर जाग्रत कर दिया है और ऐसी रचना की है जिससे हर कोई प्रभावित हुआ है,गीत को अभिनव रावत ने आवाज दी है।इसे संगीत से संगीतकार गुंजन डंगवाल ने सजाया है।

यह भी पढ़ें: अनुराधा निराला ने रिलीज़ किया कृष्णा कृष्णा भजन!कृष्ण के रंग में रंगे दर्शक !

वीडियो को दवारा देहरादून में आकाश नेगी और आइशा उत्तराखंडी पर फिल्माया गया है,इसमें आइशा एक मॉडर्न घस्येरी के किरदार में नजर आ रही हैं जो कि एक अच्छा सन्देश देने का कार्य करेगा,क्योंकि जमीनी हकीकत ठीक इसके विपरीत है मॉडर्न होते ज़माने में अब इस उम्र की घस्येरी कम ही देखने को मिलती हैं। उन्हें गाँव तो पसंद है पर वहां रहना पसंद नहीं सुख सुविधा के लिए शहरों की चार दीवरी की घुटन तो पसंद है लेकिन जो प्रकृति ने  वरदान स्वरुप पहाड़ और वहां की ताज़ी हवा उन्हें पसंद नहीं।

यह भी पढ़ें: हुलिया 6 नंबर पुलिया 10 मिलियन पार !संजय और अनिशा की गायिकी सुपरहिट!

इसी विषय पर नेगी जी की रचना न दौड़ उन्दयरी का बाटा याद आ जाती है।लीजिए आप भी आनदं लीजिए गीत लगान्दी वीडियो का और नमन है सभी पहाड़ की नारियों को जिन्होंने देवभूमि का मान रखा इसे जीवित रखने में आपका योगदान अतुलनीय है।

Facebook Comments