Uttarakhndi Festival : कुमाऊं का लोकप्रिय त्यौहार आठू -साठु पर्व

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Uttarakhndi Festival

वैसे तो उत्तराखंड त्योहारों का गढ़ है | जहां पर हर पर्व को बड़े ही उल्लास के साथ मनाये जाते है | सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि हर त्योहर को मनाने के पीछे कुछ न कुछ पौराणिक कहानियां छुपी होती हैं | एक ऐसा ही त्यौहार जिसके पीछे की कहानी बहुत सुंदर और आस्था से भरी हैं | कुमाऊं में ”आठू -साठु ” यानी गमारा पर्व मनाया जाता हैं | शिव -पार्वती की उपासना का यह पर्व खासतौर पर महिलायें करती हैं |

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आठू -साठु पर्व भाद (अगस्त ) महीने की पहली पंचमी से शुरू होता हैं व पूरे हफ्ते भर चलता हैं | महिलाएं इस पर्व में शिव -पार्वती के जीवन पर आधारित लोक गीतों पर नाचती व गाती हैं | पिथौरागढ़ ( कुमाऊं ) में यह पर्व आठू -साठु व पश्चिम नेपाल में गौरा-महेश्वर के रूप में जाना जाता हैं | साथ ही इसमें शिव -पार्वती की जीवन लीला का प्रदर्शन भी किया जाता हैं |

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कहा जाता की -जब पार्वती भगवान शिव से नाराज़ होकर मायके चली जाती हैं तो भगवान शिव माँ पार्वती को लेने धरती पे आते हैं |घर वापसी इसी मौके को यहाँ गौरा के विदाई के रूप में मनाया जाता हैं | स्थानीय लोग इसे प्रकृति से जुड़ा पर्व भी मानते हैं ,इसे आठू यानि गमारा पर्व भी कहा जाता हैं |

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इस पर्व में हरे पौधों (मक्के के पौधों ) से गौरा माई व महेश्वर को बनाया जाता हैं ,साथ ही पूजा में हाजरे के फूल व पौधे साथ ही धतूरे को भी शामिल किया जाता हैं | यह पर्व के शुरू होते ही पहले दिन 7 दाले प्रसाद के रूप में भिगोई जाती हैं ,जिन्हे पर्व के लास्ट दिन भून कर प्रसाद के रूप में खाया जाता हैं | इस पर्व को कुमाऊं में बड़ी धूम -धाम से मनाया जाता है |

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सीमा रावत की रिपोर्ट

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