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shakuntala kaintura negi

लोकगीतों को नई पहचान दे रही हैं पहाड़ की लोकगायिका शकुंतला !! बास-बास घुघूती वीडियो को देख चुके हैं 1 मिलियन दर्शक !

गीतकार कई तरह के गीतों की रचना करता है कभी प्रेम प्रसंग गीत कभी हंसी मजाक वाले गीत कभी समाज को जागरूक करने वाले गीत। हर गीत किसी न किसी विशेष उद्देश्य के लिए लिखा जाता है ,खुदेड़ गीतों ने सदैव ही पहाड़ की नारियों का दर्द,मायके की याद आने पर क्या भावना व्यक्त करती हैं गीत के माध्यम से गीतकारों ने सदैव ही इस दर्द को कागज पर उकेरा है.। खुदेड़ गीत’ बास बास घुगूती गीत से चर्चा में आई शकुंतला कैंतुरा नेगी उन्हीं गीतकारों में शुमार हैं।

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लोस्तु बढियारगढ़ पट्टी के मल्ली रिगोली की रहने वाली शकुंतला नेगी कैंतुरा ने अपने गीत एवं गायन से संगीत जगत में अपना अहम् योगदान दिया है। उनका सफर भले ही संघर्ष से भरा रहा हो पर संगीत के प्रति उनकी लगन ने उन्हें एक गीतकार/गायिका के रूप में अपना नाम स्थापित किया है। इनके गीतों में प्रकृति प्रेम झलकता है इसीलिए घुघूती को उन्होंने अपनी भुली बताया।

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अपनी माँ को प्रेरणा श्रोत मानती हैं शकुंतला नेगी कैंतुरा,माँ की लोरी ने ही उन्हें गायन के प्रति प्रेरित किया। शकुंतला कैंतुरा नेगी ने “सेम नागराजा” और गंगू रमोला से जुड़ि किम्बदन्तियों को जागर शैली में गाकर कथा स्वरुप दिया है भगवान घन्टाकर्ण गढ़वाली भजन “बुलान्दू बद्री खत्री घन्याल”जैसे भजनों के साथ ही श्री मन नारायण बद्री नारायण भजन को भी अपनी आवाज दे चुकी हैं।

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बास बास घुघूती मेरा मैत का डांडा खुदेड़ गीत काफी लोकप्रिय हुआ गीत को अभी तक 1 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। शकुंतला कैंतुरा नेगी गढ़वाली लोकगीतों को संजोने में अपना अहम योगदान दे रही हैं।जल जंगल जमीन से जुडी हुई लोकगायिका एवं गीतकार के शब्दों में पहाड़ प्रेम झलकता है। अपने बेटे प्रबोध नेगी के साथ भी शकुंतला कैंतुरा नेगी आज चली जाण मां जी भोल चली जाण गीत में आवाज दे चुकी हैं। जिसमें उन्होंने पढ़े लिखे नौजवानों को स्वरोजगार अपनाने का सन्देश दिया है तथा स्वर्ग सी सुन्दर धरती को छोड़कर नहीं जाने को कहा है।

इस गीत में संगीत विजेंद्र राणा ने दिया है साथ ही वीडियो को बढियार गढ़ पट्टी में फिल्माया गया है। लोकगायिका शकुंतला कैंतुरा नेगी अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान पारम्परिक परिधानों में दिखती हैं। और अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करती हैं।

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RAKESH DHIRWAN

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