उत्तराखडं में पैदल चल रहे यात्री भी नहीं है सुरक्षित

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उत्तराखडं में पैदल चल रहे यात्री भी नहीं है सुरक्षित

सड़क हादसों में ज़्यादातर गाड़ियों का ज़िक्र होता है। हमेशा ही खा जाता है की गाडी चलाते वक़्त हमेशा सावधानी बरते। लेकिन एक हैरान क्र देने वाली खबर यह है की उत्तराखडं में सड़कों में पैदल चलने वाले यात्री भी सुरक्षित नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 273 पैदल चल रहे यात्रियों ने अपनी जान गवां दी है अब तक। हिमाचल राज्य के बाद उत्तराखण्ड में यह आंकड़ा सबसे ज़्यादा है। लकिन देवो की भूमि कहे जाने वाले हमारे उत्तराखडं में भी इस तरह की घटनाये होने लगी है। ऐसा में उत्तराखडं के लिए एक बड़ी समस्या है की आखिर उत्तराखडं में अपने आपको सुरक्षित कैसे रखा जाए। पहले तो गाडी चलाते वक़त हो रही सड़क दुर्घटनाये जिसमे नाजाने कितने लोग मर जाते है, कितने लोगों के घर बर्बाद हो जाते है। और अब पैदल चलने वालों के लिए बड़ा खतरा।

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हमारे उत्तराखण्ड में दिन प्रतिदिन समस्याएं बढ़ रही है फिर चाहे पलायन हो, शराब, हो, नशा हो या फिर सड़क दुर्घटनाएं हो। ऐसे में सरकार इन मुद्दों पर कठोर कदम भी नहीं उठा रही है। सरकार को ज़रूर कुछ सोचना चाहिए ताकि आने वाले समय में इस तरह की कोई भी समस्या न हो। अगर गाडी चलाते वक़्त सड़क हादसों की बात करे तो देवप्रयाग – ऋषिकेश मार्ग पर सबसे ज़्यादा सड़क हादसे हुए है। पिछले पांच सालों में अब तक 104 सड़क हादसे हुए है और 84 लोगों की मौत हुई है। Problems are increasing day by day in our Uttarakhand whether it is migration, alcohol, intoxication or road accidents. In such a situation, the government is not even taking tough steps on these issues. The government must think something so that there is no such problem in the coming time. If we talk about road accidents while driving, then most of the road accidents have occurred on Devprayag – Rishikesh road. So far, 104 road accidents have occurred in the last five years and 84 people have died.

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