उत्तरकाशी भूकंप 1991पर रचा था स्वर्गीय चंद्र सिंह राही ने मार्मिक गीत,बेटे ने फिर किया भावुक।

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स्वर्गीय चंद्र सिंह राही उत्तराखंड लोक संगीत के ऐसे कलाकार थे जिन्होंने वर्तमान परिस्थतियों और घटनाओं पर गीत लिखे,वर्ष 1991 में 20 अक्टूबर की 3 बजे रात उत्तरकाशी एवं टिहरी में भूकंप ने ऐसी तबाही मचाई जिसे आज भी याद कर उत्तरकाशी के लोग भावुक हो जाते हैं,इसी दौरान घटना पर आधारित अपने हृदय की संवेदनशीलता को स्वर्गीय राही जी ने गीत में दर्शाया था।उत्तरकाशी के लोगों की पीड़ा का आभास उन्हें गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान कई बार भावुक कर देता था। 

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बीते दिनों 29 मार्च को स्वर्गीय राही जी की पुण्यतिथि थी इसी दिन एक गीत फिर से लोगों को भावुक कर गया,इस गीत की रचना स्वर्गीय चंद्र सिंह राही उत्तरकाशी भूकंप 1991के समय की थी। ‘जिंदगी का सुपिना दबीगी पठाल्यों का बीच,जो अनाथ रैगी तौंकु क्वी सहारू नी च’ ऐसे गीतों के रचनाकार अपने गीतों से सदा अमर रह जाते हैं,जो लोकसंगीत के मायने सिखा जाते हैं। गीत का हर एक शब्द उस काली रात की गवाही देता है।

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अब आपको बता देते हैं आखिर इतने सालों बाद ये गीत क्यों लोगों को भावुक कर रहा है,स्वर्गीय राही द्वारा रचित इस गीत को उनके सुपुत्र राकेश भारद्वाज और भुवनेश नैथानी ने एक बार फिर राही जी को 79 वें जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि स्वरुप उत्तरकाशी भूकंप 1991 गीत को कवर किया है।राही जी दूरदर्शी सोच के इंसान थे और तब भी प्रकृति से छेड़छाड़ न करने की सलाह देते थे और गीत में ही कहते हैं जो हुआ सो हुआ लेकिन अब तो सुध ले लो।

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स्वर्गीय राही जी के सुपुत्र राकेश भारद्वाज राही जी के ही पदचिन्हों पर आगे बढ़ रहे हैं और लोकसंगीत की वो रचनाएँ जो चंद्र सिंह राही की कलम से हुई हैं उनको नया स्वरुप देकर आज की पीढ़ी को उनकी रचनाओं एवं दूरदर्शी सोच को साकार कर रहे हैं,गीत इतना मार्मिक है कि किसी का भी ह्रदय इसे सुनकर भावुक हो जाएगा,राकेश भारद्वाज एवं भुवनेश नैथानी ने इसे बहुत ही दिल से गाया है,उत्तरकाशी की जनता के कभी न भूलने वाले निशान एक बार फिर ताजा हो गए हैं और जिसने भी ये गीत सुना अपने अश्रु नहीं रोक पाया।

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1991 उत्तरकाशी भूकंप ने करीबन 2 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया था और सैकड़ों गाँव इस आपदा के भेंट चढ़े थे इस भूकंप ने 768 लोगों की जान ली थी और ये इतिहास के काले पन्नों में गढ़वाल भूकंप के नाम से दर्ज है,इसके तीव्रता 6.8 मापी गई थी जिसने भारी तबाही मचाई और न जाने कितने लोग सुबह के 3 बजे चिरनिंद्रा में चले गए। उस दौरान ITBP के जवानों ने देवदूत बनकर कई अधमरी जानों को बचाया था जिसका जिक्र राही जी ने गीत में भी किया है।

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एक बार पुनः उन सभी पुण्य आत्माओं को श्रद्धांजलि।

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