चांचरी नृत्य शैली पर बना गीत ‘झंवरी’ हुआ रिलीज़ !

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उत्तराखंड अपनी संस्कृति एवं लोककला के लिए बिख्यात है,चांचरी लोकनृत्य शैली उत्तराखंड के कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल की पारम्परिक शैली है और इसी शैली पर बना एक गीत झंवरी यूट्यूब पर रिलीज़ हुआ है। 

उत्तराखंड में लोक नृत्यों की परंपरा बहुत प्राचीन है,यहाँ के निवासी शुभ अवसरों पर लोकगीतों के साथ-साथ या कभी कभार बिना लोकगीतों के बाजों पर भी नृत्य करते हैं,राजा महाराजों के समय से ही उत्तराखंड में कई प्रसिद्ध मेलों का आयोजन होता आया है जहाँ लोक कला एवं लोक नृत्य को बढ़ावा मिला है,किन्तु दुर्भाग्यवश ये लोक परमपराएं आधुनिक होते दौर में विलुप्त होती जा रही हैं।

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चांचरी नृत्य भी लोकनृत्य की पारम्परिक शैली है यह गढ़वाल क्षेत्र में माघ के महीने में चांदनी रातों में पुरुष एवं महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से कदम से कदम  मिलाकर किया जाने वाला श्रृंगारिक नृत्य है,इसकी विशेषता यह है इसमें मुख्य गायक घेरे के बीचों बीच हुड़की बजाते हुए नृत्य करता है। इसे कुमाऊं क्षेत्र में  झोड़ा कहा जाता है।

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mgv Digital के माधयम से चांचरी शैली पर आधारित झंवरी गीत रिलीज़ हुआ है इसे विवेक नौटियाल ने आवाज दी है और इसे सुभाष पांडे ने तालबद्ध किया है।The Audio Planet Studio में इस गीत के गायक विवेक नौटियाल ,गुंजन डंगवाल एवं सुभाष पांडे अनोखे अंदाज में गीत का आनंद लेते दिखे।

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उत्तराखंड गढ़वाल में इस गीत नृत्य के लिए चांचड़ी और झूमेला शब्द प्रचलित है जनपद चमोली में यह गीत नृत्य दांकुडी के नाम से भी जाना जाता है दक्षिण गढ़वाल में इस गीत नृत्य के लिए थडिया शब्द अधिक प्रचलित है और चांचरी झूमेलो शब्द भी इसी गीत नृत्य का बोध करता है।स्थान भेद  के कारण इस गीत नृत्य को चांचरी,चांछरी,चाचूड़ी भी उच्चारित किया जाता है लेकिन गढ़वाल में चांचड़ी शब्द ज्यादा प्रचलित है और कुमाऊं में इस गीत नृत्य के लिए चांचरी शब्द को ज्यादा प्रयोग किया जाता है!

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सुनिए आप भी चांचरी शैली का ये आधुनिक रूप झंवरी गीत के माध्यम से:

 

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