तेजी से बढ़ रहा युवाओं में अंधेपन का खतरा, जानिए वजह

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तेजी से बढ़ा रहा युवाओं में अंधेपन का खतरा, जानिए वजह

आंख हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक है, ये इतना बहुमूल्य है कि इसका कोई विकल्प नहीं है, अगर आपकी आंखें खराब हो गई तो आप बहुत मुश्किल से इसे सही कर पाएंगे, और क्या आपको पता है आधुनिक तकनीकि मोबाइल, लैपटॉप पर काम करने से आज कल युवाओं में आंधेपन का आकंड़ा बढ़ रहा है.

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स्मार्टफोन्स के अधिक इस्तेमाल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार से हानिकारक मानते हैं, बढ़े हुए स्क्रीन टाइम को अध्ययनों में तमाम प्रकार की बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता रहा है, यह आंखों के लिए भी बहुत नुकसानदायक है,स्मार्टफोन्स के अधिक इस्तेमाल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार से हानिकारक मानते हैं, बढ़े हुए स्क्रीन टाइम को अध्ययनों में तमाम प्रकार की बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता रहा है, यह आंखों के लिए भी बहुत नुकसानदायक है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार से युवा आबादी अपना ज्यादातर समय मोबाइल फोन्स के स्क्रीन के नजदीक बिता रही है, इससे स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम (एसवीएस) होने का खतरा बढ़ गया है, एक ऐसी समस्या जो आंखों की रोशनी जाने का कारण बन सकती है.

अगर इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए या फिर इसका उपचार न हो पाए तो इससे अंधेपन तक का खतरा हो सकता है, इसलिए इन बातों का ध्यान जरूर दें

  • युवा आबादी में आंखों की रोशनी कम होने की एक प्रमुख वजह फोन पर ज्यादा समय बिताने की आदत है, खासतौर पर अंधेरे में, अगर आप रात के समय लाइट बंद करके आंखों से कुछ ही दूरी पर रखकर फोन को 1-2 घंटे भी देखते रहते हैं, तो यह आपमें एसवीएस की समस्या का कारण बनने के लिए पर्याप्त है, इसलिए इनके ज्यादा इस्तेमाल से बचे.
  • केवल स्मार्टफोन ही नहीं, अगर आप अंधेरे कमरे में टीवी-लैपटॉप या अन्य किसी भी स्क्रीन को देखते हैं तो इसके कारण भी आंखों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसके शुरुआती लक्षणों में आंखों में दर्द और थकान के साथ धुंधली दृष्टि, आंखों से पानी आने, कम दिखाई देने जैसी समस्याएं होने लगती हैं,20 मिनट तक स्क्रीन पर देखने के बाद ब्रेक जरूर लें, आंखों को आराम देने के लिए पलकों को बार-बार झपकाएं।
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनने और इसके इस्तेमाल में अगर जरा भी लापरवाही की जाए तो इससे आंखों के कॉर्निया में गंभीर इंफेक्शन हो सकता है, इसमे सावधानी रखें.
  • अपनी आंखों की देखभाल करें, एक्सरसाइज से लेकर उन्हें रिलेक्श भी दें, ताकि आपकी आंखे फ्रेस फिल कर सके.

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