शीतकाल के लिए बद्रीनाथ में सम्पन्न हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया

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शीतकाल के लिए बद्रीनाथ में सम्पन्न हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया

आस्था के प्रतीक चारो धामों के मंदिरो के कपाट बंद होने की प्रक्रिया लगभग सम्पन्न हो गयी है। केदारनाथ के बाद अब बद्रीनाथ धाम के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। गढ़वाल स्काउट बैंड की धुनों के साथ मंदिर के कपाट बंद किये गए। अब 6 महीने पश्चात शीतकाल के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

Badrinath Kapaat closed

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चारो धामों के कपाट बंद होने की प्रक्रिया बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद करने के साथ सम्पन्न हुई।आज हिंदुओं की आस्था के सर्वोच्च तीर्थ बैकुंठ धाम बद्रीनाथ के कपाट विधि विधान के साथ कल 17 अक्टूबर को कर्क लग्न में शायंकाल 5 बजकर 13 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद दिये गये। अब आगामी 6 माह तक धाम में देवता स्वयं भगवान की पूजा करेंगे। बैकुंठधाम में कपाट बंदी के अवसर पर 9 हजार से भी अधिक तीर्थयात्री साक्षी बनें। इस साल लगभग 12.40 लाख तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम के दर्शन हेतु पहुँचे।आपको बता दें की 2013 आपदा के बाद बैकुंठधाम में इस साल सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर गढ़वाल स्काउट की बैंड की धुनों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरी बद्रीशपुरी भगवान बद्रीविशाल के नारों से गुंजयमान हो गयी। कपाट बंद होने के उपरांत बद्रीशपुरी में चारों ओर सन्नाटा पसर गया है। अब 6 महीने के बाद ही धाम में पसरा सन्नाटा टूटेगा।कपाट बंद होने के अवसर पर बद्रीनाथ मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया है।

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भगवान बद्रीविशाल के कपाट बंद होने के अवसर पर भगवान का श्रृंगार हजारों फूलों से किया गया साथ ही पूरे गर्भग्रह को भी फूलों से सजाया गया। फूलों के बीच भगवान श्याम पदमासन में बैठे हैं। फूलों से सजे भगवान आकर्षक रुप मे अलौकिक नजर आये। कपाट बंद से पूर्व बद्रीश पंचायत अर्थात भगवान के सानिध्य में विराजमान उद्धव जी, कुबेर जी महाराज को गर्भग्रह से बाहर लाया गया। जैसे ही उद्दव जी कुबेर जी का विग्रह बाहर लाया गया वैसे ही बदरीनाथ जी के रावल स्त्री वेश में लक्ष्मी जी की सखी बनकर लक्ष्मी जी के विग्रह को गोदी में लेकर बदरीनाथ मंदिर में भगवान के सानिध्य में विराजमान हुये। तत्पश्चात भगवान को घृत कम्बल पहनाया गया। ये ऊनी कंबल भारत के आखिरी गांव माणा की बहनों द्वारा बुनकर दिया गया। बद्रीनाथ के रावल नें इस पर घी लगाया और भगवान को घृत कम्बल ओढाया। तत्पश्चात हजारों श्रद्धालुओं, खुशगवार मौसम और सर्द हवाओं के बीच बैकुंठधाम के कपाट शायंकाल 5 बजकर 13 मिनट पर आगामी शीतकाल के लिए बंद कर दिये गये।


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शीतकाल के 6 महीने बाद धामों के कपाट विधि – विधानो के साथ खोले जायेगे तब तक स्वयं देवता इन धामों में विराजमान देवो की पूजा करेंगे।


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