केदारघाटी के गरीब परिवारों का सहारा बनी उपहार समिति, प्रवासी मजदूरों का भी रख रहे हैं ख़याल

1
626
uphar samiti hupkashi

कोरोना वायरस (CoronaVirus) के चलते देश में लगातार लॉकडाउन चल रहा है. सारे काम धंधे बंद पड़े हैं ऐसे में दूर पहाड़ी क्षेत्रों में भी ध्याड़ी मजदूर फंसे हुए हैं और गांवो में भी अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिनकी रोज़ी रोटी सिर्फ ध्याड़ी मजदूरी ही है. इस संकट की घड़ी में रुद्रप्रयाग जनपद की केदारघाटी में गुप्तकाशी से उपहार समिति (Uphar samiti)ने मदद का हाथ बढ़ाया है.

उपहार समिति केदारघाटी में लगातार सक्रिय भूमिका निभाती आई है. इससे पहले भी कई बार उपहार समिति ने गरीबों का खास ध्यान रखा है. अब तक कई गरीब कन्यावों का विवाह, बेघरों को घर, तथा अन्य कई सामाजिक कार्यों में उपहार समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. केदारघाटी के कुछ युवाओं ने इस समिति का गठन किया है ६ लोगों से शुरू हुई समिति में आज ३० से ऊपर सदस्य देशभर से जुड़ चुके हैं. समिति के सभी सदस्य 600 रुपये हर माह जोड़ते हैं और उससे किसी जरूरत मंद की सहयता करते हैं.अगर आप भी संकट की इस घड़ी में जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं तो उपहार के सदस्यौं से संपर्क कर सकते हैं.

uphar samiti work for covid 19

कोरोना संकट में इस बार गरीब लोग खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में जिनके परिवार के लोग प्राइवेट नौकरी में हैं या ध्याड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का पालन करते हैं उनके लिये बहुत ही मुश्किल दौर शुरू हो चूका है. रुद्रप्रयाग जनपद के गुप्तकाशी में उपहार समिति ऐसे परिवारों का ख़ास ध्यान रख रही है, समिति के अध्यक्ष विपिन सेमवाल से जब हमने वार्ता की तो उन्होंने बताया कि संस्था हमेशा गरीबों की सेवा में हाज़िर हैं और इस समय हमे सभी का ध्यान रखना है. अब तक सैकड़ों परिवारों तक समिति ने मदद पहुंचाई है और वो लोग लगातार गाँव गाँव जाकर या फ़ोन पर लोगों का डिटेल प्राप्त करके उन तक जरूरी सामान को पहुँचाया जा रहा है साथ ही प्रशासन को भी लगातार समिति की तरफ से आगाह किया जाता रहा है.

आपको बता दें कि केदारघाटी में भी कई प्रवासी मजदूर फंसे हुवे हैं शुरुवात में जब मजदूर पलायन कर रहे थे तो समिति ने उन्हें घर जाने तक की भी आर्थिक सहायता दी और बाकी वहां पर मौजूद मजदूरों का भी उपहार समिति लगातार ख़याल रख रही है. हम उपहार समिति के सदस्यों के इस सराहनीय कार्य के लिये उन्हें सलाम करते हैं,

Facebook Comments