पलायन को खत्म करती पहाड़ की बेटी सोनी बिष्ट , पढ़ें ये रिपोर्ट

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पलायन को खत्म करती पहाड़ की बेटी सोनी बिष्ट , पढ़ें ये रिपोर्ट

पलायन एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर गाँव की बुढ़ी आँखों में पानी भर जाता है। पलायन के कारण गाँव के गाँव खाली होते जा रहे है जो की पहाड़ की सबसे बड़ी समस्या है। पलायन का सबसे बड़ा कारण रोजगार को माना जाता है। रोजगार व पलायन जैसी समस्याओ को दूर करने की एक अनूठी पहल की शुरुआत की है पहाड़ की बेटी सोनी बिष्ट ने।

mushroom Inspiration soni bisht

सोनी बिष्ट चमोली जिले के जोशीमठ के रिंगी गांव की रहने वाली है। सोनी के माता पिता ने खेती करके सोनी को पढ़ाया लिखाया ,बचपन से अपने माता पिता को खेती करते देख सोनी के मन में कृषि के प्रति लगाव रहा है। सोनी ने बचपन से ही पलायन के दर्द को देखा है। अपने माता पिता व अपने पति व ससुरालवालो के सहयोग से सोनी ने पलायन को दूर करने व स्वरोजगार की राह खोलने के लिए मशरूम का उत्पादन शुरू किया।

सबसे पहले सोनी ने देहरादून की मशरूम गर्ल दिव्या रावत से मशरूम उत्पादन की ट्रेनिग ली और इस साल से ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू कर दिया। सोनी बिष्ट ने एक बड़े से कमरे में 300 बैगो में मशरूम मिशन की शुरुआत की। उनकी यह कोशिश अच्छे पैमाने पर सफल भी हुई। सोनी के द्वारा उत्पादित मशरूम पौड़ी के बाजारों में अच्छी कीमतों पर बिक रही है। इस सफल शुरुआत के बाद अब उन्होंने 200 ओर बैगो पर प्रयोग शुरू कर दिया है।

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सोनी बिष्ट पौड़ी को मशरूम सीटी बनाना चाहती है। कहते है जहां चाह वहां राह सोनी लगातार अपने काम को अच्छे तरिके से कर रही है। साथ ही सोनी का कहना है की उत्तराखंड में पलायन का मुख्य कारण रोजगार नहीं बल्कि युवाओ का खत्म होता आत्मविश्वास है जिसकी वजह से युवा स्वरोजगार को अपना नहीं पाते। यही कारण है की आज युवा पहाड़ में स्वरोजगार के अवसरों को ठुकरा कर शहर में पांच छ हजार की जॉब के पीछे भाग रहे होते है।

सोनी बिष्ट का मानना है की कुछ भी काम मुश्किल नहीं होता बस जरूरत होती है काम को शुरू करने की -जब मन कर लिया ऊँची उड़ान का ,तो फिर कद क्या देखना आसमान का’ कुछ ऐसे ही हौसले की मिशाल पेश करती है सोनी बिष्ट।

सीमा रावत की रिपोर्ट

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