शास्वत जे पंडित का मैश-अप रिलीज़। आप भी सुनिए ढोल और गिटार का ये मिश्रण ढोलतार !

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shaswat j pandit

संगीत-प्रेमियों ने आजतक ढोल की थाप पर मंडाण जरूर किया होगा लेकिन गिटार और ढोल का मिश्रण भी कभी हो सकता है ये बताया है युवा गायक शास्वत जे पंडित ने। ढोल और गिटार के इस बेहतरीन जोड़ को नाम दिया गया है ‘ढोलतार’,पुराने गीतों को आज के दौर के युवा नए- नए प्रयासों से उत्तराखण्ड संगीत को नया नाम दे रहे हैं और देश दुनिया में उत्तराखण्ड के संगीत को पहुंचा रहे हैं, पुराने गानों को रीक्रिएट करने का सिलसिला शास्वत पंडित ने बहुत पहले ही शुरू कर दिया था। अपनी भाषा का प्रचार-प्रसार करने लिए उन्होंने यूट्यूब पर गढ़वाली टूटोरियल भी बनाये हैं जिससे अन्य भाषी लोगों को भी गढ़वाली सीखने का मौका मिला और जो लोग अपनी बोली बोलने में झिझक रहे थे उन्हें भी गढ़वाली सिखा दी।

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पहाड़ी ढोल की थाप पर लगने वाला मण्डाण जग जाहिर है और ढोल बजते ही अपने आप श्रोताओं के पैर थिरकने लग जाते हैं। शास्वत जे पंडित ने ढोल की थाप को गिटार के साथ मिलाया और इस नए प्रयोग को नाम दिया ढोलतार।ता घेन्ता ता घेन्ता की ताल जब भी बजती है दर्शक झूम जाते हैं। गढ़वाली एवं कुमाउनी गीतों को उन्होंने नए कलेवर में पेश किया और अब तक दर्शकों को ये प्रयास पसंद भी आया है। पंडित ने ऐसे गीतों को चुना जो अपने समय में बहुत ही प्रसिद्ध थे चाहे कुमाऊं मंडल में हों या गढ़वाल मंडल में इन गानों का चलन आज भी वैसे ही यथावत है जैसे उस दौर में था उन्ही में से कुछ गीत हैं। चिट्ठी किले नी भेजी, बसंती छोरी, मेरी भनुली,सुण जा बात मेरी, ओ लाली होंसिया, बिडरू मामा।

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शास्वत के लिए ये नया प्रयास नहीं है वह इससे पहले पुराने गीतों को फ्यूजन का रूप दे चुके हैं जिसमें सरूली मेरु जिया लगिगे, ओ साथी तेरी चिठ्ठी पत्री आई ना,टिहरी डूबण लग्यूं चा,जिन्हे दर्शकों ने खूब पसंद भी किया।

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HILLYWOOD NEWS
RAKESH DHIRWAN

लीजिये आप भी सुनिए ढोल और गिटार का मिश्रण – ढोलतार

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