उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य एवं रंगकर्मी रामरतन काला का हृदय गति रुकने से निधन।

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उत्तराखंड फिल्म जगत से एक बुरी खबर है,गढ़वाली फिल्मों एवं एल्बम में अपने हास्य एवं अभिनय से लाखों दिलों पर राज करने वाले प्रसिद्ध हास्य एवं रंगकर्मी रामरतन काला का बीती रात हृदय गति रुकने से निधन हो गया,रामरतन काला गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की कई एल्बम में अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ चुके हैं। 

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1990 के दशक में आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र से स्वर्गीय रामरतन काला का गाया हुआ गीत मिथै ब्योला बने द्या उस समय गढ़वाल में काफी लोकप्रिय हुआ था,रामरतन काला कोटद्वार मानपुर के रहने वाले थे,और बीते कुछ सालों से लकवाग्रस्त हो गए थे,और इसके चलते वो रंगमंच से दूर हो गए।आखिर लम्बी बीमारी और कठिन जीवन संघर्षों के बीच हरफनमौला कलाकार रामरतन काला का बीती रात हृदय गति रुकने से देहांत हो गया।

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रंगकर्मी एवं हास्य कलाकार रामरतन काला के निधन की खबर को सुनकर उत्तराखंड फिल्म एवं संगीत जगत से जुड़े लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए शोक ब्यक्त किया है,गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी,जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण,हास्य सम्राट घनानंद घन्ना,गजेंद्र राणा ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है।

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स्वर्गीय रामरतन काला ने गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की कई सुपरहिट एल्बम में अपने दमदार अभिनय से पहाड़ के घर घर में पहचान बनाई थी,तेरु मछोई,सुदी नी बोनू,जननी कू मरयूं छौं,तितरी फंसे चखुली फंसे,समदोला ला द्वी दिन,सरु तू मेरी,हल्दी हाथ,रॉक एंड रोल जैसे गीतों में शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाई थी,लेकिन अब ये गीत रामरतन काला के लिए सदैव याद किए जाएंगे।स्वर्गीय काला को वर्ष 2004 में यूसीए ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया था।

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स्वर्गीय राम रतन काला का ऐसे असमय चले जाना उत्तराखंड फिल्म एवं कला जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है,एक कलाकार जिन्होंने अपना जीवन ही लोकभाषा के संरक्षण,अपनी संस्कृति को जीवंत रखने में इतना अहम योगदान निभाया हो उसका ऐसे चले जाना अत्यंत दुःखद है,ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे एवं परिजनों को इस कठिन घडी में साहस प्रदान करे।