Ramleela Manchan : नैनीताल में जल्द शुरू होगा रामलीला का मंचन, देखें रिपोर्ट

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नैनीताल में जल्द शुरू होगा रामलीला का मंचन

Ramleela Manchan : नैनीताल में जल्द शुरू होगा रामलीला का मंचन, देखें रिपोर्ट

वैसे तो रामलीला के विषय मे सभी जानते है। पहले की बात करे तो गांवो में रामलीला का मंचन किया जाता था।जिसमे राम जी के जन्म से लेकर रावण मरण तक कि घटनाओ का विवरण किया जाता था। ज्यादातर गाँवो में रामलीला का मंचन दशहरे से पहले किया जाता था।और दशहरे के दिन रावण दहन के साथ रामलीला का समापन किया जाता था।लेकिन जबसे सारे शहर गांव डिजिटल हुए है तबसे रामलीला जैसे मंचन खो गए है।

Ramleela Manchan

अब कोई भी व्यक्ति इन मंचनो को ज्यादा पसन्द नही करते और शायद इसी वजह से अब ये पौराणिक मंचनो का महत्व विलुप्त होते जा रहे है।
किन्तु कुछ संस्कृति प्रेमीयों ने अभी भी इन विरासतों को संभाले रखा हुआ है।
आपको बता दें कि उत्तराखंड के कुछ गांवों में अभी भी दशहरे के वक़्त रामलीला का मंचन बड़े हर्षोल्लास के साथ के किया जाता हैं।एक ऐसे ही भव्य मंचन का आयोजन नैनीताल में किया जाता है।

आपको बता दें नैनीताल में मल्लीताल की रामलीला की शुरूआत सन 1918 में राम सेवक सभा की स्थापना के साथ ही शुरू हो गयी थी| शुरूआती दौर में यह रामलीला खुले मैदान में होती थी जिसे आलू पड़ाव कहा जाता था पर 1928 में चेतराम साह ठुलघरिया ने कमिश्नर से कह के रामलीला स्टेज की स्थापना करवाई और उसके बाद से रामलीला स्टेज में रामलीला का मंचन होने लगा।

Ramleela Manchan

यहां की रामलीला में पारसी थियेटर का प्रभाव देखा जा सकता है। उसी से प्रभावित होकर यहां के कलाकारों ने रामलीला का मंचन शुरू किया। शुरू-शुरू में होली गायकों ने इसमें हिस्सेदारी की जिस कारण रामलीला में संगीत का प्रभाव आने लगा और फिर इसे संगीतमय बनाया जाने लगा।

यहां की रामलीला के बारे में एक रोचक बात और है और आपको बता दें की कहा जाता है कि अपने अल्मोड़ा प्रवास के दौरान जब पं. उदय शंकर ने यहां की रामलीला देखी तो वो इससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर एक नृत्य नाटिका भी बनायी जिसका उन्होंने नैनीताल में भी मंचन किया था।

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इस रामलीला को अब लगभग सौ वर्ष हो चुके हैं और आज भी यहां कि रामलीला पारंपरिक तरीके से ही की जाती है हालांकि थोड़ा-बहुत आधुनिकता का असर अब दिखने लगा है| इस बार भी दशहरे के समय उत्तराखंड में नैनीताल के साथ साथ अन्य जगहों पर भी रामलीला मंचन किया जायेगा। आधुनिकता के दौर में ऐसे मंचन को बढ़ावा देने वाले लोगो का कार्य प्रशसनीय है।

सीमा रावत की रिपोर्ट

देखें गुंजन डंगवाल का फुल इंटरव्यू :-

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