पम्मी नवल ने पांडवों की पंचकेदार यात्रा का जागर रूप में सुन्दर वर्णन किया है आप भी देखें!! जानें पंच-केदारों के बारे में !!

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महाभारत की कहानी से सभी भली भांति परिचित हैं कुरुक्षेत्र में धर्म और अधर्म की लड़ाई में धर्म की जीत हुई और पांडवों द्वारा कौरव कुल का सर्वनाश किया गया।लेकिन गौत्र हत्या करने का पाप पांडवों पर लग गया,उसके उपरांत वेद व्यास ऋषि ने सुझाव दिया कि गौत्र हत्या के पाप से सृष्टि के रचियता भगवान शिव शंकर ही मुक्त करा सकते हैं। इसीलिए पांच पांडव सहित द्रौपदी भी पंचकेदार यात्रा के लिए निकल गए। लोकगायिका पम्मी नवल ने पंचकेदार यात्रा का बहुत सुन्दर वर्णन अपने गीत के माध्यम से किया है।

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आइए जानते हैं पंचकेदार के बारे में शिव भगवान् किस रूप में कहाँ विराजमान हैं:
केदारनाथ – भगवान शिव का बारहवां ज्योत्रिलिंग। विग्रह के पृष्ट भाग की होती है पूजा
मद्महेश्वर – भगवान शंकर के मध्य नाभि भाग के दर्शन होते है।
तुंगनाथ – भगवान शिव की भुजा के रूप में आराधना होती है
रुद्रनाथ – बुग्यालों के बीच गुफा में भगवान शिव के मुखर विंद अर्थात चेहरे के दर्शन में होते हैं।
कल्पेश्वर – यहां भगवान की जटा के दर्शन होते हैं, बारहों महीने यहां भगवान शिव के दर्शन होते है।

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पंच केदार का वर्णन स्कंद पुराण के केदारखंड में स्पष्ट रूप से वर्णित है। पंच केदार में प्रथम केदार भगवान केदारनाथ हैं, जिन्हें बारहवें ज्योर्तिलिंग के रूप में भी जाना जाता है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर हैं। तृतीय केदार तुंगनाथ, चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ और पंचम केदार कलेश्वर हैं। पंच केदार की कथा है कि महाभारत युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे। पांडव भगवान शिव को खोजते हुए हिमालय पहुंचे।

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भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे अंतरध्यान होकर केदार में जा बसे। पांडव उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच गए। भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं के बीच चले गए। पांडवों को संदेह हुआ तो भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया। भीम ने दो पहाड़ों पर पैर फैला दिए। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए पर भगवान शंकर रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बैल पर झपटे तो बैल भूमि में अंतरध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति और दृढ़ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं।
माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतरध्यान हुए तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुईं। इसलिए इन चार स्थानों के साथ केदारनाथ धाम को पंचकेदार कहा जाता है।

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लोकगायिका पम्मी नवल ने पंचकेदार यात्रा का बहुत सुन्दर वर्णन किया है अपने गीत के माध्यम से गीत में संगीत दिया है ईशान डोभाल ने।
देखिए वीडियो और दर्शन कीजिए भगवान् शिव के पंचकेदारों का:

HILLYWOOD NEWS
RAKESH DHIRWAN

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