उत्तराखण्डी गीतों में बामणी शब्द को लेकर क्या कहता है ये उत्तराखण्डी गीत

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उत्तराखण्डी गीतों में बामणी शब्द को लेकर क्या कहता है ये उत्तराखण्डी गीत

अक्सर कुछ उत्तराखण्डी गीत ऐसे सुनने को मिलते हैं जिसमें बामणी का जिक्र जरूर होता है कभी कभी तो बामणी शब्द को लेकर ही पूरा गीत सुनने को मिलता है एक तरफ जहां ऐसे गानों को लोगों का प्यार मिलता है वहीं दूसरी तरफ उत्तराखण्डी गीतों में बामणी शब्द को लेकर लोग नाखुश भी हैं क्योंकि उनको लगता है कि बामणों के बारे में अनगल बातें होती है जिसमें बिल्कुल भी वास्तविकता नहीं होती। कुछ ऐसा ही गीत अभी हाल ही में रिलीज हुआ है गीत के बोल हैं ‘‘निन्दा ना कर बामणु की’’ इस गीत में ये बताने की कोशिश की गयी है कि उत्तराखण्ड के जो संगीतकार बामण देवताओं पर अनगल गीत गा रहे हैं वो आगे सोच समझकर ही गाये और जो भी गाये उसमें वास्तविकता होनी चाहिए न कि मनोरंजन करके मिथ्या दोष लगाकर निंदा करें जो लोग बामणों की निन्दा करते हैं और बामणों पर अनगल गीत गाते हैं ये अच्छा नहीं है।

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ब्राहमण समाज का गुरू है समाज का दपर्ण है और गुरू पर ही हम अनेक प्रकार के मिथ्या दोष लगाने लगेंगे तो फिर समाज क्या कहेगा। बामण के द्वारा ही समाज को सुन्दर शिक्षा और सुन्दर संस्कार दिये जाते हैं, बामण जगत गुरू है यूूं बामणों को उत्तराखण्डी गीतों में गा कर बामणों की निन्दा न करें। तो कुछ ऐसा गीत है ये इस गीत को गाया और लिखा है हरिकृष्ण रतूड़ी ने और संगीत दिया है डी.एस रावत के साथ हरिकृष्ण रतूड़ी ने। अब देखना यह होगा कि इस गीत को लेकर लोग क्या प्रतिक्रियाये देते हैं आप भी इस गीत को लिंक के माध्यम से देख सकते हैं।

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