प्रथम भारतीय शिक्षा मंत्री के जन्मदिवस पर मनाया जा रहा है राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

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National Education Day

‘सभी पढ़े सभी बढ़े” यह स्लोगन सबने सुना होगा। शिक्षा का अधिकार सभी को है और पूरे भारत में आज का दिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में मनाया जाता है। आज का युग रूढ़िवादी नहीं है आज के युग में चाहे लड़का हो या लड़की हर किसी को स्वत्रंतता से पढ़ने का हक़ है। भारतीय संविधान में भी शिक्षा को मौलिक अधिकार माना गया है। आपको बता दें की यह राष्ट्रीय शिक्षा दिवस सैनानी मौलाना के जन्मदिवस के दिन मनाया जाता है सन 1888 में स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म हुआ था। सितंबर 11, 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह फैसला किया कि 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में मनाया जाना चाहिए।

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मौलाना जी हमारे देश के प्रथम शिक्षा मंत्री थे उन्हें स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, लेखक के रुप में जाना जाता है। 2008 से हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में मनाया जाता है। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, लेखक के रुप में जाना जाता है। मौलाना अबुल कलाम आजाद एक शिक्षाविद् तो थे ही साथ ही एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे। स्वतंत्रता संग्राम के समय वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्थापना की थी। उनका मुख्य लक्ष्य प्राइमरी शिक्षा को बढ़ाना था। 1992 में उन्हें भारत रत्न से भी नवाजा गया था। भारत की आजादी के बाद मौलाना अबुल कलाम ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC की स्थापना की थी।

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अपने पद का सही इस्तेमाल करते हुए उन्होंने हमेशा शिक्षा को बढ़ावा दिया। शिक्षा के प्रति उन्होंने कई नीतिया लागू की, और यहीं कारण है की आज उनके जन्मदिवस को शिक्षा दिवस के रूप में सम्पूर्ण राष्ट्र में मनाया जा रहा है।

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