अंतिम पड़ाव गिरिया के लिए आज रवाना हुई मदमहेश्वर महादेव की डोली

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Madamaheshwar Mahadev

द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली रांसी गांव से अपने अंतिम पड़ाव गिरिया के लिए आज रवाना हो गई। शुक्रवार को डोली अपने दूसरे पड़ाव रांसी गांव स्थित राकेश्वरी मंदिर पहुंची थी। जहां भक्तों ने डोली का भव्य स्वागत किया। आज शनिवार को डोली रात्रि प्रवास के लिए अपने अंतिम पड़ाव गिरिया पहुंचेगी। 24 नवंबर को आराध्य मद्महेश्वर अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में छह माह के लिए विराजमान होंगे।

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शुक्रवार को सुबह सात बजे गौंडार गांव में हक-हकूकधारी ग्रामीणों ने अपने आराध्य को सामूहिक अर्घ्य लगाया। इस मौके पर मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने बाबा का श्रृंगार कर भोग लगाते हुए आरती उतारी। सुबह 9.30 बजे भक्तों के जयकारों के साथ द्वितीय केदार की चल विग्रह डोली ने दूसरे पड़ाव के लिए प्रस्थान किया।

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इस दौरान गौंडार के ग्रामीणों ने गांव की सीमा तक डोली को विदा किया। छह किमी का रास्ता तय करने के बाद डोली दोपहर बाद दो बजे रांसी गांव स्थित राकेश्वरी मंदिर पहुंची। मंदिर की परिक्रमा के बाद डोली मंदिर परिसर में विराजमान हुई। इस मौके पर रांसी के ग्रामीणों ने देवता को सामूहिक अर्घ्य लगाया। मंदिर के पुजारी व डोली के पुजारी ने संयुक्त रूप से देवी-देवताओं की आरती उतारी। महिला व युवक मंगल दल द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया। इस मौके पर डोली प्रभारी वाईएस पुष्पवाण, मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत, ग्राम प्रधान विक्रम सिंह, क्षेपंस कुंती देवी, मदन सिंह पंवार, प्रधानाचार्य रघुवीर पुष्वाण, रवींद्र भट्ट, पूर्ण सिंह खोयाल, कार्तिक खोयाल, सभासद रवींद्र रावत समेत कई भक्तजन मौजूद थे।

रांसी गांव में 15 वर्ष के उपरांत इस वर्ष पांडव नृत्य का आयोजन हो रहा है। शुक्रवार को पांडव पश्वाओं ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की अगवानी की। इस मौके पर स्कूली बच्चे भी मौजूद थे। गांव में द्वितीय केदार और पांडवों के इस अद्भुत मिलन के साक्षी बने सैकड़ों भक्तजन भी भावुक हो उठे।

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