रक्षाबंधन पर सुनिए शगुन उनियाल का गीत फौजी भाई की याद में खुद लेगी !

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उत्तराखंड की मधुर आवाज और सबकी दुलारी गायिका शगुन उनियाल का रक्षा बंधन के अवसर पर अपने फौजी भाई की याद में खुद लेगी गीत जय वासुदेव म्यूजिक से रिलीज़ हुआ है जो कि दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है। 

भाई बहनों के इस पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन के अवसर पर शगुन उनियाल का बहुत ही मार्मिक गीत रिलीज़ हुआ है,इससे शगुन उनियाल ने अपनी खैरी लगाई है साथ ही देश रक्षा में गए हुए अपने फौजी भाई को याद करके ये करुणा गीत गाकर आज उन भाइयों को रुला दिया जो इस अवसर पर अपनी बहनों से दूर हैं और आज उनकी कलाइयां सूनी हैं।

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जय वासुदेव म्यूजिक के निर्माता विजेंद्र रौथाण का कहना है ये गीत इतना शानदार बना था कि इसे हम जल्दी रिलीज़ करना चाहते थे लेकिन रक्षाबंधन से अच्छा कोई शुभ अवसर नहीं हो सकता था,और इस गीत के अवसर से फौजी भाइयों का दर्द भी दिखला दिया कि कैसे एक देश का सिपाही सीमा पर अपने परिवार से दूर रह कर भी दिन रात अपना धर्म निभाता है।

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भाई बहन के रिश्ते की तो बात ही निराली है इसमें लड़ाई भी है तो उतना ही प्यार भी लेकिन जैसे जैसे बहन बड़ी हो जाती है उसके दूर जाने का अहसास होने लगता है और है तो पराया धन ही एक न एक दिन बहन की विदाई तो करनी ही है और वो पल एक भाई के लिए बेहद दुःख दाई होता है एक तरफ अपना फर्ज निभाना होता है तो एक तरफ उसकी विदाई से आँगन सूना हो जाता है ,माँ के बाद बहन ही होती है जो अपने भाई का इतना ख्याल रखती है और एक दोस्त के रूप में लड़ती भी है तो सुःख- दुःख में साथ भी देती है।

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आज सभी बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधा पर वो भाई कैसे सूनी कलाई लेकर बॉर्डर पर अटल खड़ा है जिसपर देश रक्षा का भार है,ईश्वर सभी फौजी भाइयों की रक्षा करे यही कामना करते हैं और बॉर्डर से कभी भी तिरंगा इन वीरों की शहादत में इन पर लिपटे न ,सभी फौजी भाई सकुशल लौटें जिससे हर एक बहन इस पावन पर्व के दिन अपनी आँखें नम न करे।

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आप भी सुनिए राकेश बर्त्वाल द्वारा रचित और शगुन उनियाल एवं राकेश बर्त्वाल की ये रचना खुद लेगी। इसे संगीत से विनोद पांडेय ने सजाया है।

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