कुमाउनी रामायण चांचरी रिलीज, जबरदस्त शब्दों से कंठ का तड़का

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उत्तराखड का संगीत भले ही समय के साथ बदल रहा हो और लगातार गीतों में बॉलीवुड की झलक देखने को मिलती है लेकिन आज भी उत्तराखंडी संगीत अपनी संस्कृति को अपने पारम्परिक गीतों के माध्यम से बचाता और निरंतर आगे बढ़ाता है, जिसका जीता जागत उदाहरण बीते दिन पहले रिलीज हुए गीत Ramayan Chanchri” में भरपूर सुनने को मिला है l 

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दरअसल, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से पूरा देश राममय है और तब से लेकर अभी तक हर रोज रामलला से जुड़े नए-नए गीत रिलीज हो रहें हैं , जिसके बाद उत्तराखंड के लोकगायक “संदीप सोनू (Sandeep Sonu)”ने भी कुमाउनी भाषा  में रामायण चांचरी रिलीज कर दी और अपनी आवाज के माध्यम से दर्शकों के बीच बखूबी प्रस्तुत्त भी किया है जिसमें कंठ निकले शब्दों से ज्यादा हकीकत का अनुभव देखने को मिला l संदीप सोनू के संस्कृति से जुड़े इस गीत में Lalit Gityar के एक अलग स्तर के संगीत का दबदबा भी देखने को मिला जिसने गीत को करुणामयी और भक्तिमयी से भरा बना दिया l

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कहा जाता है कि गीत और नृत्य को जीवन का संचार है और सही मायने में लोक में रचे-बसे गीत और नृत्य ही उस समाज की संस्कृति को विशिष्टता प्रदान करते हैं कुमाउनी संगीत जगत निरंतर उत्तराखंड की शानदार प्राकृतिक सुंदरता को प्रदर्शित कर रहा है, और राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की विरासत को सजोए रख रहा है l 

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