जानिए भगवान शिव और पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर से जुड़ी खास मान्यतायें

0
219
जानिए भगवान शिव और पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर से जुड़ी खास मान्यतायें

उत्तराखंड जिसे देवों की नगरी कहा जाता है, जहां कई देवी देवताओं का राज है, यूं तो हम समय समय पर आपको यहां मौजूद मंदिरों की जानकारी देते रहते हैं, उनकी विशेषताओं के बारे आप सभी को रूबरू करवाते रहते हैं, उसी तरह आज भी हम आपको उत्तराखंड के खास मंदिरों में गिने जाने वाले त्रियुगीनारायण की सैर करवाएंगे, और उससे जुड़ी खास बातों को भी बताएंगे.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड के ऊखीमठ का ओंकारेश्वर मंदिर, जानिए क्यों शिव भक्तों के लिए खास है ये जगह

उत्तराखंड के रूद्रयाग जिले में स्थित, भगवान विष्णु को समर्पित पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर वह पवित्र और विशेष  मंदिर है जहां साक्षात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जिसमें भगवान विष्णु ने भाई का रूप धारण किया था और दुनिया के पालनहार भगवान ब्रह्मा की भूमिका निभाई थी, यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, इस मंदिर में जल रही अग्नि जिसके बारे में कहा जाता है कि ये लौ महादेव और माता पार्वती के विवाह के समय से ही जल रही है, इसी अग्नि को ही साक्षी मानकर भगवान शिव और माता पार्वती ने विवाह किया था, इसी वजह से इसे त्रियुगी मंदिर कहते हैं.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड का वो रहस्यमयी मंदिर, जहां हर दिन होता है चमत्कार, यहां जाने विस्तार से

पौराणिक मंदिर त्रियुगीनारायण तीन शब्दों से बना है, त्रि, युगी और नारायण, त्रि का मतलब है तीन, युगी काल युग को दिखाता है और नारायण भगवान विष्णु का दूसरा नाम है,  उत्तराखंड का त्रियुगीनारायण गांव लगभग 1,980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और ये सोनप्रयाग से मंदाकिनी और सोनगंगा नदियों के संगम से 5 किलोमीटर दूर है, जानकारी के लिए बता दें शानदार पहाड़ों से घिरा और ऊंचाई पर स्थित होने के कारण, त्रियुगीनारायण मंदिर मार्च-जून की गर्मियों या वसंत के महीनों में दर्शन करने लायक अच्छा समय है.

यह भी पढ़ें: जानिए महासू देवता मंदिर और उनकी कहानी

आप इस मंदिर में जाएंगे तो आपको यहां ब्रह्म शिला जगह दिखेगी, जिसके बारे में कहा जाता है कि यही वो जगह हैं जहां शिव और पार्वती ने सात फेरे लिए थे, मंदिर के पास तीन पवित्र कुंड (तालाब) हैं, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड, यहां पानी सरस्वती कुंड से जाता है, ऐसे माना जाता है कि ये पानी भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न होता है। अपने धार्मिक महत्व के कारण त्रियुगीनारायण मंदिर शादी समारोह के रूप में काफी लोकप्रिय हुआ है। मंदिर को अखंड धूनी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

यह भी पढ़ें: जानिए देवलगढ़ के इस खास मंदिर का इतिहास, कैसे हुआ माता गौरा का यहां निवास 

आज के समय इस मंदिर को वैडिंग डेस्टिनेशन के लिए भी जाना जाता है, आजकल देश-विदेश में शादियों का डेस्टिनेशन वेडिंग का नया ट्रेंड चल चुका है, समय और लाइफस्टाइल बदलने के साथ अधिकांश कपल डेस्टिनेशन वेडिंग की ओर रुख कर रहे हैं,डेस्टिनेशन वेडिंग में कपल अपनी मर्जी से किसी खास जगह की चुनाव करके अपने वहां अपने अनुसार शादी के बंधन में बंधते हैं, वैडिंग डेस्टिनेशन के लिए देश के साथ विदेशी जोड़ों की शिव व पार्वती त्रियुगीनारायण मंदिर पहली पसंद बन रहा है, जिसके चलते साल भर में कई श्रद्धालों इस मंदिर का रूख करते रहते हैं.

उत्तराखंड फिल्म एवं संगीत जगत की सभी ख़बरों को विस्तार से देखने के लिए हिलीवुड न्यूज़ को यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें।