किशना की ‘जय देवी नंदुला’ में सुनिए मां नंदा के जन्म से राजजात तक की कहानी !

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उत्तराखण्ड में होने वाली विश्व की सबसे लम्बी पैदल यात्रा विश्व भर में प्रसिद्ध है ,माँ नंदा भगवान् शिव की अर्धांगनी हैं और कैलाश (हिमालय)शिव का वास मान्यता है कि एक बार माँ नंदा मायके आई थी लेकिन किन्हीं कारणों वश वो कैलाश नहीं जा पाई,12 वर्षों के बाद जब माँ नंदा लौटी तो उनको आदर सत्कार के साथ विदाई दी गई तब से ही ये मान्यता प्रचलित है हर 12 वर्ष में होने वाली नंदा राजजात 2014 में हुई थी।

लोकगायक किशन महिपाल एवं मीना राणा ने माँ नंदा के जन्म से लेकर राजजात यात्रा तक का वर्णन गीत के माध्यम से किया है,30 गीतों का संग्रह किशन महिपाल के यूट्यूब चैनल पर ऑडियो ज्यूक बॉक्स रिलीज़ किया गया है। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर माँ नंदा के जागर एवं गीतों का शोध डॉ नन्द किशोर हटवाल ने किया है।इसमें संगीत संजय कुमोला ने दिया है।

चमोली जिले में पट्टी चांदपुर श्रीगुरु क्षेत्र को माँ नंदा का मायका और बधाण को माँ नंदा भगवती का ससुराल माना जाता है,एशिया की सबसे लम्बी पैदल यात्रा जो कि 280 किमी की 20 दिवसीय यात्रा है ,उत्तराखण्ड गढ़ -कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत है।

nanda devi yatra

7 वीं शताब्दी में गढ़वाल के राजा शालीपाल ने चांदपुर गढ़ी से देवी माँ नंदा को कैलाश भेजने की परंपरा शुरू की थी,उसके बाद राजा कनकपाल ने इस यात्रा को भव्य रूप दिया तबसे ही इस परंपरा का निर्वहन गढ़वाल राजा के प्रतिनिधि कांसुवा गांव के राज कुंवर नौटी गांव के राजगुरु नौटियाल ब्राह्मणों सहित 12 थोकि ब्राह्मण और 14 सयानों के सहयोग से होता आ रहा है।

चौसिंघीय खाड़ू यात्रा की अगवानी करता है,खडु की पीठ पर माँ नंदा की श्रृंगार सामग्री एवं देवी भक्तों की भेंट की पोटली जिसे स्थानीय भाषा में फंची कहा जाता है बंधी होती है,यात्रा उनीश पड़ावों में सम्पन होती है। इसका पहला पड़ाव 10 किलोमीटर पर ईड़ा बधाणी है। उसके बाद दो पड़ाव नौटी में होते हैं। नौटी के बाद सेम, कोटी, भगोती, कुलसारी, चेपड़ियूं, नन्दकेशरी, फल्दिया गांव, मुन्दोली, वाण, गैरोलीपातल, पातरनचौणियां होते हुये यात्रा शिलासमुद्र होते हुये अपने गन्तव्य होमकुण्ड पहुंचती है। इस कुण्ड में पिण्डदान और पूजा अर्चना के बाद चौसिंग्या खाडू को हिमालय की चोटियों की ओर विदा करने के बाद यात्रा नीचे उतरने लगती है।

लोकगायक किशन महिपाल लोकगीतों एवं संस्कृति के प्रति समर्पित हैं,घुघति,फ्योंलडिया,जैसे कई गीतों को जीवंत रूप देने का काम किया है।

जय माँ नंदा
Hillywood News
Rakesh Dhirwan

सुनिए माँ नंदा के गीत एवं जागर:

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