दर्शन फर्स्वाण की जौ की हरियाली सभी देवों तें समर्पित : वीडियो रिलीज़

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युवा गायक दर्शन फर्स्वाण दादू गौरिया गीत की सफलता के बाद एक बार फिर संगीत जगत में चर्चाओं में हैं,वसंत के अवसर पर रिलीज़ हुआ दर्शन का गीत जौ की हरियाली सभी से प्रशंशा पा रहा है। दर्शन ने गीत में जौ की हरियाली के महत्त्व के बारे में बताया है,जो कि भूमियाल देवताओं को चढ़ाई जाती है।क्योंकि माना जाता है कि वसंत ऋतू की पहली फसल जौ ही होती है। वसंत पंचमी के दिन से वसंत ऋ‍तु का आगाज़ होता है।

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दर्शन फर्स्वाण का गीत जौ की हरियाली A plus यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ हुआ है, जिसे संगीत रणजीत सिंह ने दिया है, ऑडियो सपोर्ट के लिए बनाये गए वीडियो में दर्शन फर्स्वाण सरसों के पीले खेतों के बीच सुर लगाते नजर आए।वसंत पंचमी के दिन से वसंत ऋ‍तु का आगाज़ होता है। इससे सभी में न सिर्फ नई ऊर्जा का संचार होता है बल्कि चारों और हरियाली देखकर मन भी शांत होता है। वसंत ऋतु सेहत के लिहाज से भी अच्छी मानी जाती है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए सुबह से ही घरों में मां सरस्वती की पूजा होने लगती है।जौ की हरियाली सुख समृद्धि का प्रतीक है इसीलिए दर्शन ने अपने गीत के माध्यम से समस्त देवी देवताओं को हरियाली भेंट की है जिससे सुख़ सम्पदा बनी रहे।
दर्शन ने गीत में जौ की हरियाली सजाई मोरी का नारेणा,भूमि का भूमियाल,बद्री केदार का द्वार, हरी का हरिद्वार एवं माँ नंदा के शीश पर सजाई है।

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पढ़ें हरेला का महत्त्व :
उत्तराखंड के घर-घर में मनाया जाने वाला यह पर्व बहुत ही उत्साह,उमंग व उम्मीदों के साथ मनाया जाता है उम्मीद अच्छी फसल होने की ,उम्मीद सुख ,समृद्धि व शांति की । इसलिए सात अनाजों को जौ, गेहूं मक्का ,गहत, सरसों उड़द भटृ (काला सोयावीन) को एक छोटी सी रिंगाल की टोकरी में मिट्टी डालकर बोया जाता है। हर बीज को अलग-अलग परत बनाकर बोया जाता है ।इस तरह सात परतै बनाई जाती है। और इस टोकरी को सूर्य की रोशनी से दूर घर के पवित्र स्थान मंदिर में रखा जाता है ।सात अनाज जो सात जन्मों का प्रतीक भी माना गया है ।हर रोज इसमें आवश्यकतानुसार पानी डाला जाता है धीरे-धीरे उन बीजों से छोटे-छोटे हरे पौधे उगने लगते हैं इन्हीं पौधों को हरेला कहते हैं।

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नवै दिन इसकी सांकेतिक रूप से गुड़ाई की जाती है ।तथा दसवें दिन गृहस्वामी या घर की किसी बुजुर्ग महिला द्वारा इस को काटा जाता है।उसके बाद सबसे पहले अपने इष्ट देव का टीका (अक्षत व रोली या पिठया)करके पूरे विधि विधान के साथ इस हरेले से पूजन किया जाता है ।उसके बाद घर के अन्य सदस्यों का टीका लगाकर इन हरेलों(अनाज के पौधे) से पूजन किया जाता है। सूरज की रोशनी से दूर होने के कारण इन हरेलों का रंग पीला होता है।इसको आशीर्वाद स्वरूप सिर पर रखा जाता है या कान में लगाया जाता। वुर्जुग महिला घर के सभी सदस्यों का हरेला पूजन बहुत ही सुंदर गीत गाते हुए करती है।

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युवा गायक दर्शन फर्स्वाण का दादू गौरिया भी काफी सुपरहिट हुआ था,दर्शन ने अभी तक पारम्परिक गीतों को ही गाया है जिससे उनका अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम स्पष्ट रूप से झलकता है।
और उत्तराखण्ड संगीत-प्रेमियों को भी ऐसे ऐतिहासिक गीत सुनने को मिलते हैं.

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HILLYWOOD NEWS
RAKESH DHIRWAN

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