देहरादून में दिखी प्लास्टिक के विरुद्ध लाखो की मानव श्रृंखला, आमजनता को करना पड़ा जाम का सामना

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Dehradun Pollution

दिल्ली एक ऐसा शहर जो की सबसे प्रदूषित जगह मानी जाती है। प्रदूषण के कारण दिल्ली में स्वास्थ आपातकाल भी घोषित किया गया है। सभी स्कूलों का भी अवकाश घोषित है तथा सबको हिदायत दी गयी है की अपने घरो से ज्यादा बाहर न निकले व घरो में ही रहे। दिल्ली के बाद अब देहरादून शहर भी इस प्रदूषण की चपेट में आ रहा है और इस प्रदूषण के परिणाम को भापकर कर देहरादून में प्रदूषण के सबसे बड़े कारक प्लास्टिक के प्रति एक रैली निकली गयी जिसमे प्लास्टिक का विरोध किया गया।

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देहरादून में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के खिलाफ नगर निगम की ओर से एक मानव श्रृंखला बनाई गई। इस मानव श्रृंखला में लगभग एक लाख से ज्यादा लोग उपस्थित रहे। इस रैली को जनता को जागरूक करने के निकाली गयी लेकिन इस रैली की वजह से आम जनता को परेशान करके रख दिया । करीब पांच घंटे रूट डायवर्ट रहने के कारण शहर में जाम लगा रहा। रूट डायवर्ट के चलते लोगों इधर से उधर भटकते रहे। इस दौरान कई लोगों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। पटेलनगर चौक पर तो करीब एक किलोमीटर लंबा जाम भी लगा।

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आपको बता दें की इस रैली और मानव श्रृंखला को लेकर निगम व पुलिस ने दावा किया था कि प्लान से आमजन को कोई असुविधा नहीं होगी और सामान्य यातायात सुचारू चलता रहेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं सरकार व निगम की सारी प्लानिंग धरी की धरी रह गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग गलियों और शहर के मुख्य चौराहों पर लगाए जिसके कारण सुबह से ही लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, महापौर सुनील उनियाल गामा, नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने मियांवाला चौक पहुंचकर इस मिशन की शुरूआत की। सिटी पेट्रोल यूनिट के प्रभारी प्रदीप रावत ने बताया कि मानव शृंखला के दौरान शहर में चलने विक्रम, ऑटो, रिक्शा, सिटी बस और व्यावसायिक वाहन नहीं चलाए गए।इस वजह से लोगो को कई मुसीबतो का सामना करना पड़ा। जहां एक तरफ इस रैली का उद्देश्य देहरादून को प्लास्टिक मुक्त बनाना था वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोगो का यह भी मनना है की जनमानस को परेशानी देकर किस तरह से जनहित किया जा सकता है।

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कुछ लोगो ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा की इस तरह से कब तक जनता को परेशान किया जाएगा। कुछ का कहना है की इससे अच्छा है प्लास्टिक उत्पादन फैक्ट्रीयों को ही बंद किया जाना चाहिए जिससे इस समस्या का समाधान हो पाए। देखते है सरकार का यह प्रयास कितना सक्षम होता है।

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