आखिर कब तक होती रहेंगी लड़कियां रेप का शिकार

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victim of rape

रेप, बलत्कार या फिर यौन हिंसा किसी एक देश की समस्या नहीं है। पूरी दुनिया की महिलाएं इस समस्या से जूझ रही है। अमेरिका, कनाडा, स्वीडेन, और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में रेप की सबसे ज़्यादा घटनाएं होती है। दुनिया भर में करीब करीब 35 फीसदी महिलायें रेप समस्याओं से परेशान है।

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अगर हमारे देश यानी हिन्दुस्तान की बात की जाए तोह यहाँ भी महिलायें अब सुरक्षित नहीं है देश के हर कोने, हर टपके, हर सिटी में महिलाओं के साथ रेप जैसी घटनाये होती है। यहाँ तक की छोटी छोटी बच्चियों के साथ भी ऐसी घिनौनी हरकते की जाती है। अगर सरकार की बात करे तो हमेशा से ही ऐसे गंभीर मुद्दों पर चुप ही रही है। सिर्फ कानून में बदलाव करना ही सब कुछ नहीं है। उनमे अमल करना भी ज़रूरी है। बात करे निर्भया केस के बारें में तो क्यों हर बार आरोपियों की दलीलों को सुनना पड़ता है। पिछले सात या आठ सालों से इस केस को लेकर आरोपियों की फांसी को लेकर हमेशा बात होती है। लेकर फांसी नहीं। निर्भया के साथ इन्साफ नहीं आखिर कब तक ऐसा चलेगा। कब तक लोग निर्भया केस में कैंडल मार्च करते रहेंगे। सड़कों पर प्रदर्शन करते रहेंगे।

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इतना ही नहीं अब हमारे उत्तराखंड से भी आये दिन खबरें आ रही है। ऊतराखंड जिसे देवो की भूमि कहा जाता है। लेकिन यहाँ बेटियां, महिलाएं सुरक्षित नहीं है। आखिर कब तक ऐसा चलेगा। सरकार, प्रशाशन हज़ारों, लाखों, करोड़ों रूपये किसी का किसी चीज़ ख़र्च करती है। लेकिन हमारी देश की बेटियों और महिलाओं के ऊपर उनकी सुरक्षा के ऊपर एक भी पैसा ख़र्च नहीं होता। क्या हमारी सरकार इतनी कमज़ोर है ? भारत के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार हमारे देश में 2010 के बाद महिलाओं के साथ रेप जैसी घटनाएं बढ़ रही है।

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