आज से शुरू हुआ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2080,पढ़े खास रिपोर्ट

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हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र और आखिरी महीना फाल्गुन होता है। हर साल चैत्र प्रतिप्रदा तिथि से नया विक्रम संवत शुरू हो जाता है जो इस बार संवत्सर का नाम नल होगा, राजा बुध ग्रह होंगे और मंत्री शुक्र ग्रह होंगे।

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बता दें आजसे हिंदू कैलेंडर का नया वर्ष विक्रम संवत 2080 की शुरुआत हो गई है। हिंदू विक्रम संवत 2080 अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 2023 से 57 वर्ष आगे होगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि से 9 दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना का महापर्व भी आरंभ हो जाएगा। हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र और आखिरी महीना फाल्गुन होता है। हर साल चैत्र प्रतिप्रदा तिथि से नया विक्रम संवत शुरू हो जाता है जो इस बार संवत्सर का नाम नल होगा, राजा बुध ग्रह होंगे और मंत्री शुक्र ग्रह होंगे। आइए जानते है l

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हिंदू विक्रम संवत 2080 के बारे में खास बातें –

1- विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने शुरू किया था। राजा विक्रमादित्य ने अपनी विक्रम संवत के शुरू होने पर अपनी जनता के सभी कर्जों से राहत प्रदान की थी। विक्रम संवत हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाती है। इस संवत को गणितीय नजरिए से एकदम सटीक काल गणना माना जाता है। विक्रम संवत को राष्ट्रीय संवत माना गया है। नए विक्रम संवत के शुरूआत होने पर देश के अलग-अलग स्थानों पर इसके अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

2- चैत्र महीना जोकि हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है यह होली के बाद शुरू हो जाता है। यानी फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा लग जाती है फिर भी उसके 15 दिन बाद नया हिंदू नववर्ष क्यों मनाया जाता है?  दरअसल इसके पीछे क्या तर्क है कि हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तिथि के 15 दिनों तक रहता है और कृष्ण पक्ष के इन 15 दिनों में चंद्रमा धीरे-धीरे लगातार घटने के कारण पूरे आकाश में अंधेरा छाने लगता है। सनातन धर्म का आधार हमेशा अंधेरे से उजाले की तरफ बढ़ने का रहा है यानि “तमसो मां ज्योतिर्गमय्”। इसी वजह से चैत्र माह के लगने के 15 दिन बाद जब जब शुक्ल पक्ष लगता है और प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष मनाया जाता है। अमावस्या के अगले दिन शुक्ल पक्ष लगने से चंद्रमा हर एक दिन बढ़ता जाता है जिससे अंधकार से प्रकाश की समय आगे बढ़ता है।

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3- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इस वजह से भी चैत्र प्रतिपदा तिथि का इतना महत्व है।

4 – इसी दिन से नया संवत्सर भी आरंभ हो जाता है इसलिए इस तिथि को नवसंवत्सर भी कहते हैं। सभी चारों युगों में सबसे पहले सतयुग का प्रारम्भ इसी तिथि यानी चैत्र प्रतिपदा से हुआ था। यह तिथि सृष्टि के कालचक्र प्रारंभ और पहला दिन भी माना जाता है।

5- हिंदू नववर्ष को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा तथा आंध्र प्रदेश में उगादी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। भगवान झूलेलाल की जयंती, चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ, गुड़ी पड़वा,उगादी पर्व मनाए जाते हैं।

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