Himalaya Diwas : हिमालय दिवस पर विचारणीय पहलू , 9 सितम्बर को मनाया जाता है खास

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Himalaya Diwas

हिमालय हमारे उत्तराखंड की धरोहर है ये पहाड़, इनकी खूबसूरत वादियां का रहन सहन और यहां के पशु पक्षियों का जीवन यही तो शान है हमारे उत्तराखंड की | इन पहाड़ो को बचाने के लिए कई बार आंदोलन हुए है और कई त्यौहार के रूप में भी पहाड़ो को बचाने का संदेश दिया जाता है | 9 सितंबर जो की हिमालय दिवस के रूप में मनाया जाता है | जिस दिन हिमालय को बचाने की शपथ ली जाती है साथ ही कई कार्यक्रमों के तहत पेड़ लगाए जाते है साथ ही कई विचार रखे जाते है और हिमालय को बचाने की बाते कही जाती है | किन्तु बात जो गौर करने लायक है वो यह है कि आखिर हिमालयों को बचाने की जरूर पड़ी क्यों ? हर जगह बाते की जाती है पहाड़ो को बचाने की आवश्यकता है लेकिन क्या यह जानने की कोशिश की किसी ने की आखिर इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी ?

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हमारे पहाड़ जो की हमारी शान है कही न कही उनकी ख़ूबसूरती खत्म होती जा रही है, जिसका मूल कारण हम ही है और हमारी लापरवाही है | अक्सर हम दोष देते है उन्हें जो बाहर से आते है और इन पहाड़ो को गंदगी का केंद्र बना जाते है | लेकिन उनको दोष देने से पहले शायद हमे खुद को भी देखना चाहिए की आखिर क्या हम पहाड़ की प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रहे है | पहाड़ बचाओ यह बात कहने की जरूरत ही न पड़े अगर हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों का सही से पालन करे |
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पहाड़ में सभी को घूमने का अधिकार है लेकिन अगर वो पहाड़ो में गंदगी करते है तो हमारी जिम्मेदारी बनती है की हम उन्हें सचेत करे | पहाड़ो को बचाया तभी सकता है जब पहाड़ो को बचाने वाले पहाड़ो में बसे हो अक्सर लोग पहाड़ो की कठिनाइयों को देखकर पहाड़ो से दूर चले जाते है | जब परिवार में बच्चे माँ बाप को छोड़कर विदेश चले जाते है तो माँ पिता की जो स्थिति होती है वो ही इन पहाड़ो की भी हो जाती है |
पहाड़ों को बचाये रखना है तो आवश्यकता है पहाड़ में पहाड़ियों का बचे रहना | अगर पहाड़ के लोग पहाड़ो में रहेंगे तो उनकी जागरूकता इन पहाड़ो को इन पहाड़ो की सुंदरता को बचाये रख सकती है |

सीमा रावत की रिपोर्ट

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