Girish Pant का वीडियो हो रहा वायरल,उत्तराखंडी भाषा को बचाने की अपील की।

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गिरीश पंत का वीडियो हो रहा वायरल,उत्तराखंडी भाषा को बचाने की अपील की।

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. जिसके माध्यम से Girish Pant उत्तराखंडी बोली-भाषा को बचाने की अपील करते हुए नजर आ रहे हैं. आप भी देखें वीडियो.

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यूं तो समय के साथ आगे बढ़ना जरूरी है. लेकिन अपनी बोली-भाषा और संस्कृति को भूलना गलत है. यह बेहद सोचनीय विषय है. हालांकि वर्तमान समय में उत्तराखंड का युवा वर्ग हर क्षेत्र में अपने नाम के साथ-साथ उत्तराखंड का नाम भी रोशन कर रहा है. जो गौरव की बात है. लेकिन आज की युवा पीढ़ी गढ़वाली और कुमाऊनी भाषा बोलने में हिचकिचाती है. इसका मुख्य कारण पलायन माना जा रहा है. गावों से निकल लोग शहरों की ओर रोजगार और सुविधाओं के लिए पलायन कर रहे हैं. इसके अलावा जितना अन्य भाषाओं का प्रचार-प्रचार किया जाता है,उतना गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाओं का नहीं किया जाता है. यहां तक कि उत्तराखंड में रहने के बावजूद भी कई लोग इन भाषाओं का प्रयोग तक नहीं करते हैं.

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वहीं इन दिनों यूरोप में रह रहे (Girish Pant) गिरीश पंत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें गढ़वाली, कुमाऊंनी भाषाओं के संरक्षण करने की अपील करते हुए नजर आए. वीडियो में उन्होंने उत्तराखंड के लोगों को अपनी बोली-भाषा के अस्तित्व बचाने और बोलने की अपील की है. उनका कहना है कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी में बात नहीं करते हैं. न ही उन्हें सिखाते हैं. जिससे हमारी बोली-भाषा के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

आप भी देखें वीडियो।

https://youtu.be/R5y8m0iYaoE

वीडियो में गिरीश पंत खुद भी गढ़वाली भाषा में बोलते दिखाई दे रहे हैं. राजू मूल रूप से पौड़ी के रहने वाले हैं. औऱ वे इन दिनों उत्तराखंड में हैं. साथ ही उत्तराखंडी भाषाओं के संरक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं.

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बता दें कि यूनेस्को ने गढ़वाली औऱ कुमाऊंनी भाषाओं को संकटग्रस्त सूची में शामिल किया है. संभवत यह आधुनिकता का परिणाम है. जो कि हम अपनी बोली-भाषाओं को तवज्जो नहीं दे रहे हैं. भले ही अब कई चिंतकों द्वारा अपने स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि सरकार को भी इसके प्रति गंभीरता से पहल करनी होगी.

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