समाज को प्रेरित करते हैं गीताराम के गीत,हे बौजी में दिखी संजू,शालिनी की जबरदस्त एक्टिंग।

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उत्तराखंड के युवा गायक गीताराम कंसवाल अपने गीतों से समाज को एक सन्देश देने का हर संभव प्रयास करते हैं,देवर भाभी पर आधारित गीत हे बौजी का वीडियो यूट्यूब पर रिलीज़ हुआ है,पहाड़ की नारियों का संघर्ष किसी से छिपा नहीं है फिर भी ये पहाड़ जैसी विशाल होती हैं और हर मुश्किल से उबरने की ताकत रखती हैं,कुछ ऐसा ही ये वीडियो भी दर्शाता है। 

 Geetaram's songs inspire the society, Sanju seen in O Bouji, Shalini's tremendous acting.

 

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हे बौजी ऑडियो की सफलता के बाद अब इसका वीडियो आ चुका है,वीडियो में संजू सिलोड़ी और शालिनी सुन्द्रियाल मुख्य भूमिका में रही,वीडियो का निर्देशन संजू सिलोड़ी ने किया है,वीडियो दर्शकों की शानदार प्रतिक्रिया पा रहा है।गीताराम कंसवाल के गीतों में समाज की झलक दिखती है,द्यूर बौजी पर उत्तराखंड में कई गीत बने हैं लेकिन इस गीत में मान ,सम्मान और मर्यादा है जो किसी भी सभ्य समाज की निशानी होती हैं।

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वीडियो में दोनों ही कलाकारों ने अपने जबरदस्त अभिनय का परिचय दिया है,वीडियो को संजू ने बखूबी निर्देशित किया है जो दर्शकों की गाँव की सैर कराने में समर्थ है,गीत देवर और भाभी के संवादों पर आधारित है जो देवर का अपनी भाभी के प्रति सम्मान और फ़िक्र दर्शाता है कि इतनी छोटी सी उम्र में आपको क्या तकलीफ है मुझे बताएं।साथ ही गीत पहाड़ की नारियों के संघर्ष को भी दिखलाता है जो घर के काम-काजों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान भी नहीं रख पाती।

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गीत को गीताराम कंसवाल और स्वरकोकिला मीना राणा ने स्वर दिए हैं,इसे संगीत से संजय कुमोला ने सजाया है,वीडियो का फिल्मांकन एवं संपादन देवेंद्र नेगी ने किया है।वीडियो को टिहरी गढ़वाल के ख़ासपट्टी सेमल्सु गाँव में फिल्माया गया है. गीताराम कंसवाल निश्चित तौर पर ऐसे गीतों की रचना करने के लिए बधाई के पात्र हैं जो समाज को मनोरंजन के साथ ही सन्देश देने का भी कार्य करते हैं,इससे पहले भी गीताराम कंसवाल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर भी बरसु की 18 जैसे गीत की रचना कर चुके हैं।

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कमेंट बॉक्स में इस वीडियो की प्रशंसा पर अनेकों टिप्पणियां इस गीत के उद्देश्य को सिद्ध करते हैं,गीताराम कंसवाल जरूर अन्य गीतकारों को सीख देने का कार्य कर रहे हैं गीत मात्र मनोरंजन और फूहड़ता नहीं दर्शाते बल्कि एक समाज का चित्रण करते हैं,अगर आपके गीतों से समाज में बदलाव लाया जा सकता है तो फिर क्यों फूहड़ता से भरे गीतों की रचना होती है।

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