उत्तराखंड में पलायन की स्थिति को बयां करता गीत “पीड़ा मेरा पहाड़ की” देखिये क्या है इसमें खास

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Garhwali song New song 2019

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पीड़ा मेरा पहाड़ की शीर्षक देखकर आपने अंदाजा लगा ही लिया होगा कि आखिर क्यों हुवा ऐसा चलिए आपको विस्तार से बताते हैं हमारे शीर्षक के पीछे की सच्चाई कि आखिर क्यूँ गीतकार को ये गीत लिखना और गाना पड़ा |

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आजकल यूट्यूब मनोरंजन का सुगम माध्यम बन चुका है आसानी से कहीं भी कभी भी आनंद ले सकते हैं किन्तु सत्य ये भी है मनोरंजन ही जीवन का मुख्य उद्देश्य नहीं होता। समाज में रहना समाज में तालमेल बनाए रखना, समाज के लिए कुछ करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। समाज को एक सन्देश देना समाज को जागरूक करना आपका कर्तव्य बनता है। गीत संगीत का इसमें सदैव ही योगदान रहा है चाहे वो उत्तराखंड आंदोलन हो या कुरीतियों को समाज के सामने लाना हो। कुछ दिनों पहले उत्तराखंडी लोकगायक विनोद बगियाल का गीत ‘पीड़ा मेरा पहाड़ की ‘ उत्तराखंड राज्य की वर्तमान स्थितियों को दर्शाता प्रतीत होता है ,एक कहावत भी है कि उत्तराखंड की जवानी और उत्तराखंड का पानी कभी भी उत्तराखंड के काम नहीं आ पाया। विनोद बगियाल ने अपनी रचना में उत्तराखंड में हो रहे पलायन पर कटाक्ष किया है और उत्तराखंड वासियों को सन्देश दिया है 100, 200 गज में कब तक उत्तराखंड छोड़ चुके लोगों का गुजारा होता रहेगा | एक न एक दिन लौटना ही पडेगा अपने घर गाँव की तरफ। इस प्रकार के गीतों से ही शायद जाग जाएँ पलायन करने वाले लोग इसकी रचना का उदेश्य यही हो सकता है। गीत को सुनकर अपनी राय जरूर दें क्या यही वास्तविकता है आप गीतकार के शब्दों से कितना सहमत है? अब ये तो आपको देखना है |

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बामणी 2 गीत की रचना का क्या था उद्देश्य जानना जरुरी है – देखें पलायन पर कटाक्ष – गीत के माध्यम से

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इस गीत को हार्दिक फिल्म्स ने प्रस्तुत किया है और गीतकार के शब्दों को संगीतमय बनाया है अमित वी कपूर ने | हिली वुड न्यूज़ इस गीत की पूरी टीम को बधाई देता है कि आप लोग इसी तरह से काम करते रहें और गीतों के माध्यम से समाज को जागृत करते रहें |

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