डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने गाया ‘अभी भी है समय’ गीत।

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देश के यशस्वी एवं ऊर्जावान शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल अपनी सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते हैं,कुशल राजनेता होने के साथ डॉ निशंक कलम के भी अच्छे ज्ञाता हैं,और कई कविताओं को समाज हित में लिख चुके हैं,नंदा कैसेट्स ने अभी भी है समय गीत को अपने यूट्यूब चैनल से रिलीज़ किया है जिसमें रमेश पोखरियाल निशंक ने ही आवाज दी है। 

इन दिनों डॉ रमेश पोखरियाल देश को नई शिक्षा नीति को लेकर चर्चाओं में हैं,इसी बीच उनकी बहुत पहले युवाओं को प्रेरित करती कुछ पंक्तियां गीत का रूप ले चुकी हैं जो नंदा कैसट्स ने लांच किया है,गीत के रचनाकार डॉ निशंक है और आवाज भी उन्होंने ही दी है यह गीत युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

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डॉ निशंक युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं और उनके आदर्श भी हैं, समय कितना महत्व पूर्ण होता है इस गीत के माध्यम से युवाओं को सीखने को मिलेगा और मेहनत ही सफलता की जननी होती है ये इस गीत का मुख्य उदेश्य है।

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रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं। अब तक हिन्दी साहित्य की तमाम विधाओं (कविता, उपन्यास, खण्ड काव्य, लघु कहानी, यात्रा साहित्य आदि) में प्रकाशित उनकी कृतियों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। राष्ट्रवाद की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। यही कारण है कि उनका नाम राष्ट्रकवियों की श्रेणी में शामिल है।

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यह ‘निशंक’ के साहित्य की प्रासंगिकता और मौलिकता है कि अब तक उनके साहित्य को विश्व की कई भाषाओं (जर्मन, अंग्रेजी, फ्रैंच, तेलुगु, मलयालम, मराठी आदि) में अनूदित किया जा चुका है। इसके अलावा उनके साहित्य को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनके साहित्य पर अब तक कई शिक्षाविद् ( श्यामधर तिवारी, डाॅ0 विनय डबराल, डाॅ0 नगेन्द्र, डाॅ0 सविता मोहन, डाॅ0 नन्द किशोर और डाॅ0 सुधाकर तिवारी) शोध कार्य तथा पी.एचडी. रिपोर्ट लिख चुके हैं।

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अब भी डाॅ0 ‘निशंक’ के साहित्य पर कई राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (गढ़वाल विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश, रोहेलखण्ड विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा मेरठ विश्वविद्यालय) में शोध कार्य जारी है।

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डॉ निशंक का पहला कविता संग्रह वर्ष 1983 में ‘समर्पण’ प्रकाशित हुआ। अब तक इनके 10 कविता संग्रह, 12 कहानी संग्रह, 10 उपन्यास, 2 पर्यटन ग्रन्थ, 6 बाल साहित्य, 2 व्यक्तित्व विकास समेत कुल 4 दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद dr nishank लेखन जारी है।

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अब तक डाॅ0 ‘निशंक’ की प्रकाशित कृतियां निम्न हैः 1 .रोशनी की एक किरण (1986) 2. बस एक ही इच्छा,(1989),3.क्या नहीं हो सकता (1993)4. भीड़ साक्षी है (1993),5. एक और कहानी (2002)

प्रमुख उपन्यास: 1 मेजर निराला (1997) 2. पहाड़ से ऊंचा (2000),3. बीरा (2008),4. निशान्त (2008)

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मुख्य लेख: 1. हिमालय का महाकुम्भः नन्दा देवी राजजात (पावन पारम्परिक यात्रा), 2009 ,2. स्पर्श गंगा: उत्तराखण्ड की पवित्र नदियां,3. आओ सीखें कहानियों से (बाल कहानियां- हिन्दी एवं अंग्रेजी), 2010,4. सफलता के अचूक मंत्र (व्यक्तित्व विकास- हिन्दी एवं अंग्रेजी), 2010,5. कर्म पर विश्वास करें, भाग्य पर नहीं (व्यक्तित्व विकास), 2011

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