दे दे प्यार दे ’की समीक्षा: अजय देवगन, तब्बू और रकुल प्रीत सिंह की फिल्म ने मानवीय रिश्तों में जमकर सेंध लगाई

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ajay devgan de de pyar

अजय देवगन, तब्बू और रकुल प्रीत सिंह स्टारर फिल्म दे दे प्यार दे को आकिव अली ने डायरेक्ट किया है. कहानी-प्रोडक्शन लव रंजन का है. पढ़ें आखिर इस फिल्म में क्या खास है और क्यों इसे देख सकते हैं…

देश में चुनावी शोर और सिनेमा हॉल में एवेंजर्स एंडगेम का ज़ोर करीब खत्म होने को है। इस बीच बॉक्स ऑफिस पर एक और बॉलीवुड मसाला फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ रिलीज हुई है. इस मल्टीस्टारर फिल्म के ट्रेलर की काफी तारीफ हुई थी। अजय देवगन-तब्बू-रकुल प्रीत सिंह जैसे स्टार्स से सजी फिल्म को आकिव अली ने डायरेक्ट किया है। कहानी-प्रोडक्शन लव रंजन का है।

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क्या खास है फिल्म में और क्यों देखी जाए।

कहानी क्या है…

फिल्म की कहानी काफी सिंपल-सी है,जिसकी शुरुआत लंदन से होती है। एक 50 साल का बिजनेसमैन आशीष (अजय देवगन) है जो परिवार से अलग रहता है, वह 26 साल की लड़की आयशा (रकुल प्रीत सिंह) से मिलता है फिर एक गाना आता है और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं, बात आगे बढ़ी तो प्यार हो गया। आशीष को लगा आयशा को अपने परिवार से मिलाऊं, तो वह इंडिया आता है। वहां पर अपनी पत्नी मंजू (तब्बू), बेटा-बेटी-माता-पिता से मिलवाता है,मंजू और आयशा में कुछ खटपट होती है, आशीष को देख उसकी बेटी नाराज हो जाती है और उसका रिश्ता खतरे में आ जाता है।

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आशीष रिश्ता जुड़वा देता है, इतनी देर में आयशा लंदन चली जाती है। मंजू और आशीष के बीच सब ठीक होने लगता है.लेकिन आशीष का दिल अभी भी आयशा के साथ है और फिर बेटी की शादी के दौरान आशीष-आयशा एक हो जाते हैं. मंजू अलग ही रहती है।


क्यों फिल्म देखना चाहेंगे?

अब मुद्दे पर आते हैं कि फिल्म क्यों देखनी चाहिए। दरअसल, ये फिल्म आपको आज के मॉर्डन जमाने से जोड़ेगी, जहां पर प्यार के बीच उम्र का बंधन नहीं है, रिश्तों का बंधन नहीं है. हर कोई खुले तौर पर अपनी ज़िंदगी जी रहा है. यानी रिश्तों की गहराइयों को लेकर कुछ समझा रहे हैं. इस बीच फिल्म कॉमेडी का तड़का तो है ही, ट्रेलर के अंदर जो आपको डायलॉग दिखे थे उसके अलावा भी कई ऐसे सीन और डायलॉग हैं जो आपको हंसने को मजबूर कर देंगे. साथ ही कुछ डबल मिनिंग पंच भी हैं, जो यूथ को पसंद आ सकते हैं.

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फिल्म के पहले हाफ में रकुल प्रीत सिंह आपको चौंका सकती हैं, क्योंकि जिस हिसाब से उनके पास अच्छे पंच हैं और उन्होंने जैसे उसका इस्तेमाल किया है वह उनके करियर के हिसाब से काबिले तारीफ है. वहीं, तब्बू ने दूसरे हाफ में समां बांध दिया है. उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज एक्टिंग ने डूबते हुए दूसरे हाफ में भी दर्शकों को बांध कर रखा.

कहां चूक कर गई फिल्म?

फिल्म की कहानी जिस तरह से रची गई है वो ही आपको अपने आप में खटक सकती है. वो इसलिए क्योंकि फिल्म के दौरान कई जगह आपको मिसमैच दिखेगा, जो ना सिर्फ एक क्रिटिक बल्कि आम दर्शक भी देख सकेगा. फिल्म के सारे अच्छे पंच (5-10 जो भी थे) रकुल के नाम कर दिए गए, बाकी तब्बू ने संभाले. लेकिन वो भी दूसरे हाफ में गर्त में चले गए.

फिल्म में आपको अजय देवगन निराश कर सकते हैं, वो इसलिए क्योंकि अगर कॉमेडी फिल्म के नाम पर आप अजय से गोलमाल की उम्मीद कर रहे हैं तो निराशा हो सकती है. क्योंकि वह एक पति, लवर और पिता के रूप में हर बार कन्फ्यूज ही दिखे और उनके पास कुछ खास पंच भी नहीं थे, जो शायद रोहित शेट्टी के साथ रहते उन्हें मिलते थे. एक समय आपको ये भी लग सकता है कि अजय आखिर कर क्या रहे हैं।

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तब्बू इस फिल्म को बांधकर रखती हैं, दूसरा हाफ तो पूरी तरह से उनपर ही निर्भर है। उनके पास कॉमिक टाइमिंग है, इमोशनल सीन है और नोकझोंक करने वाला मस्त अंदाज भी है, जिसमें उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है.

फेल हो गए लव रंजन?

प्यार का पंचनामा, सोनू के टीटू की स्वीटी जैसी फिल्मों के बाद लव रंजन कॉमेडी फिल्मों में एक उभरते नाम की तरह हैं. लेकिन इस बार उनकी कहानी ने निराश किया है, हालांकि वह इस फिल्म के डायरेक्टर तो नहीं हैं लेकिन स्क्रिट उनकी ही है. उनकी तरफ से कोशिश तो की गई कि थोड़ा वैसा ही तड़का दे सकें, लेकिन हो नहीं सका. फिल्म को आकिव अली ने डायरेक्ट किया है, जो कि पेशे से एडिटर हैं और उनका ये डायरेक्शन में डेब्यू है. हालांकि, फिल्म की एडिटिंग ही माशाल्लाह है. क्योंकि फिल्म के आखिर में आपको ऐसा भी लगेगा कि सबकुछ जल्दी-जल्दी खत्म करने के चक्कर में समेटा जा रहा है.

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लेकिन कुछ जबरदस्त पंच, डायलॉग के साथ-साथ गानों के लिए ये फिल्म मसाला वाली श्रेणी में आएगी, बॉक्स ऑफिस पर पैसा भी कमाएगी।

Hillywood News
Rakesh Dhirwan
ट्रेलर देख के फिल्म का टिकट खरीद लें।

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