दर्शन फर्स्वाण का नया भजन ‘बधाणगढ़ी की देवी’ छा रहा है शोसल मिडिया पर

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दर्शन फर्स्वाण का नया भजन 'बधाणगढ़ी की देवी' छा रहा है शोसल मिडिया पर

माता रानी  ‘बधाणगढ़ी की देवी’ राजराजेश्वरी की आरधना से परिपूर्ण उत्तराखंड लोकगायक दर्शन फर्स्वाण का नया भजन रिलीज हो गया है, कुछ दिनों पहले यानि  अश्विन मास के नवरात्रों से पहले यह भजन दर्शकों के बीच जारी हुआ जो की रिलीरिजिंग के बाद से ही और अब तक दर्शकों के जुबां पर लगातार छा रहा है l 

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दर्शन फर्स्वाण(Darshan Farswan) का नाम उत्तराखँड के ऐसे युवा गायकों में शुमार हैं जिन्होनें अपने गीत और गायन की अलग शैली से इंडस्ट्री में महारथ हासिल की है, दर्शन कई प्रतिभाओं के धनी हैं. वे गायन के साथ-साथ लेखन शैली में निपूर्ण हैं, इससे पहले शिव भक्ति पर व अन्य कई देवी देवताओं पर आधारित उनके कई गीत रिलीज हुए हैं, जिन गीतों ने सभी दर्शकों को अपने रंग में रंगाया, उनके लगभग सभी गीत लगातार दर्शकों की पसंद बने हुए हैं, और अब उनका यह नया भजन भी दर्शकों की जुबान पर चढ़ गया है l

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आपको बता दें की दर्शन फर्स्वाण का यह नया भजन उन्होंने अपने ऑफिसियल अकॉउंट से दर्शकों के बीच जारी किया है उन्होंने नवरात्रों की पावन बेला पर माता के भक्तों के लिए नया तोहफा दिया है l वही आपको बताते दें की माँ राजराजेश्वरी के इस सुन्दर भजन के लिरिस्क Premchandra Devrari के द्वारा लिखें गए है जबकि इस प्यारे भजन को अपना सुन्दर म्यूजिक Virendra Pawar के द्वारा दिया गया है l वही भजन को Rhytm – Mahesh Chand के द्वारा दिया गया है l

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वही आपको यह भी बता दें की बधाणगढ़ी मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है एवम् यह मंदिर एक ताल में स्थित है जो कि ग्वालधाम से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर काफी ऊचाई पर स्थित है और बहुत ही सुंदर है । भगवान काली माता और भगवान शिव मंदिर (भगवान एक लिंग कहा जाता है) और कालीमाता मंदिर के मंदिर को “बधाण” कहा जाता है और यह मंदिर एक ही पहाड़ पर स्थित है इसलिए यही कारण है कि इस मंदिर को “बधाणगढ़ी मंदिर” कहा जाता है । यह मंदिर देवी काली को समर्पित है , जिसे दक्षिण कली और भगवान शिव के रूप में भी जाना जाता है | इस मन्दिर को कत्युरी वंश के शासन के दौरान बनाया गया था जिनका 8वी और 12वी शताब्दी तक इस क्षेत्र पर शासन था | यह मंदिर इस क्षेत्र का लोकप्रिय मंदिर भी है , जिसे चिल्ला घाटी भी कहा जाता है । बधाणगढ़ी मंदिर समुन्द्र स्तर से ऊपर 2260 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहाँ मांगी जाने वाले हर मनोकामना जरुर पूरी होती है | बधाणगढ़ी मंदिर से उत्तराखंड में कुछ प्रमुख चोटियों जैसे नंददेवी, त्रिशूल, पंचचुली जैसे कुछ लोगों के नाम पर भी एक मनोरम दृश्य प्राप्त हो सकता है । इस स्थान से ट्रैकिंग का आनंद भी लिया जा सकता है क्योंकि इस ताल से ट्रैक करना बहुत ही आसान होता है l

यहां सुने पूरा भजन 

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