इस दीपावली के बाद वातावरण रहा साफ़, प्रदूषण रहा नियंत्रण में

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दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो अपने साथ कई खुशियाँ लाता है। पूरा भारत एक दुल्हन की तरह दिखता है। जहां यह त्यौहार हर जगह खुशी और रोशनी लाता है, वहीं यह प्रदूषण को भी साथ लाता है। इस प्रदूषण की वजह से कई लोगो को बिमारियों का सामना करना पड़ता है सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है और ये सब होता है दिवाली में इस्तेमाल पटाखों से। लोग आतिशबाजी में पटाखों का इस्तेमाल करते है जिससे भयानक धुंआ निकलता है व पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।

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दीपावली से पहले दीपावली पर हर कोई प्रदूषण को लेकर चिंतित रहता था। उत्तराखंड सरकार के साथ-साथ स्वैच्छिक संगठनों ने भी लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाया। इसका परिणाम अब सामने आया है। प्रदूषण बोर्ड द्वारा सोमवार को रिपोर्ट जारी की गई थी, जो प्रदूषण मानकों से अधिक नहीं पाई गई है। यह रिपोर्ट शहर के चार स्टेशनों की है, जिसके अनुसार देहरादून के दून अस्पताल और रायपुर क्षेत्र में सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी अमित पोखरियाल ने कहा कि हवा में पीएम 10 की मात्रा मानकों से अधिक नहीं पाई गई है। उन्होंने इसे एक हफ्ते पहले से प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान का नतीजा बताया। पोखरियाल ने कहा कि इस दिवाली में प्रदूषण देश के अन्य राज्यों में अधिक बढ़ा है और इसकी तुलना में देहरादून में प्रदूषण बहुत कम हुआ है।

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इस बार पटाखों की बिक्री भी बहुत कम थी और इस वजह से प्रदूषण का माप कम था, ऐसा कहा जाता है कि पटाखों की दुकानों की संख्या भी कम है और लोगों ने पटाखों से परहेज किया है। पटाखे की दुकानों को भिगोना दिखाई दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण मानकों से कम था।

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