12 वर्ष बाद नीले-पर्पल नीलकुरिंजिनी के फूल से ढका केरल

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Nilkurinjini

आज तक आप सबने 12 वर्ष में लगने वाला कुम्भ तो सुना होगा लेकिन 12 सालो में खिलने वाले फूलों के बारे बहुत ही कम लोग जानते होंगे। जी हाँ, एक ऐसा फूल जो 12 साल में एक बार खिलता है और जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते है। इस फूल का नाम है नीलकुरिंजिनि जो की भारत देश के केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में पाया जाता है। आपको बता दें की 2006 के पुरे 12 साल बाद अब इस फूल के खिलने का समय आ गया है। केरल के मुन्नार में 12 साल बाद एक बार फिर नीलकुरिंजिनी के फूल खिल गए हैं। नीलकुरिंजिनी के फूल हर 12 साल में एक बार खिलते हैं और इस सीजन में पूरा मुन्नार नीला-पर्पल हो जाता है। सिर्फ मुन्नार ही नहीं कर्नाटक के वेस्टर्न घाट और तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत पर भी हर 12 साल में नीलकुरिंजिनी के फूल खिलते हैं।

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कर्नाटक में बेल्लारी जिले की संदूर पर्वत श्रृंखला भी अगस्त के बाद से ही नीलकुरिंजिनी के फूलों से भर गई है। इसके आलावा तमिलनाडु की नीलगिरी पर्वत श्रृंखला का नाम भी इन्हीं फूलों के चलते पड़ा है। भारत में इन फूलों की करीब 46 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये फूल पर्पल के आलावा नीले, हरे और लाल रंग में भी मिलते हैं। दुनिया भर में नीलकुरिंजिनी की 240 प्रजातियां पाई जाती हैं। फिलहाल मुन्नार में नीलकुरिंजिनी का सीजन शुरू हो गया है जो अगली सर्दियों तक चलेगा। केरल के मुन्नार में 12 साल बाद एक बार फिर नीलकुरिंजिनी के फूल खिल गए हैं। नीलकुरिंजिनी के फूल हर 12 साल में एक बार खिलते हैं और इस सीजन में पूरा मुन्नार नीला-पर्पल हो जाता है। सिर्फ मुन्नार ही नहीं कर्नाटक के वेस्टर्न घाट और तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत पर भी हर 12 साल में नीलकुरिंजिनी के फूल खिलते हैं।

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बताया जाता है कि तमिल में 2000 साल पहले लिखी गई कविताओं में भी इन फूलों का ज़िक्र आता रहा है। फिलहाल भारत में इन फूलों की करीब 46 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये फूल पर्पल के आलावा नीले, हरे और लाल रंग में भी मिलते हैं। दुनिया भर में नीलकुरिंजिनी की 240 प्रजातियां पाई जाती हैं। फिलहाल मुन्नार में नीलकुरिंजिनी का सीजन शुरू हो गया है जो अगली सर्दियों तक चलेगा। दुनिया भर से लोग इन फूलो के देखने आते है। इस बार पर्यटकों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है आर्थिक रूप से भी इस बार यह नीलकुरिंजिनि मददगार साबित होने वाला है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक उच्च स्तरीय बैठक में तय हुआ है कि पर्यटकों की सुविधा और इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण के लिए पर्याप्त तैयारियां और सुरक्षात्मक उपाय किए जाएंगे। मुन्नार शहर से आठ किलोमीटर दूर स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान नीलकुरिंजी का एक प्रमुख स्थल है।

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