जानिए उत्तराखंड के इस भूतिया गांव का दर्दनाक सच, सुनकर खडे हो जाएंगे रोंगटे

0
जानिए उत्तराखंड के इस भूतिया गांव का दर्दनाक सच, सुनकर खडे हो जाएंगे रोंगटे

पर्यटन के दृष्य से विश्व पटल तक अपनी पहचान रखने वाले उत्तराखंड से कई कहानियां जुड़ी हुई हैं जिन पर भले ही बाहर के लोग विश्वास ना करते हों लेकिन यहां रह रहे लोगों के जीवन में उनका बड़ा महत्व है, और ऐसी ही एक कहानी हम आपको बताएंगे, जिस पर शायद आपका याकीन करना मुश्किल हो जाए लेकिन ग्रामीणों के अनुसार यह सच है.

यह भी पढ़ें: क्या आपने सुनी है उत्तराखंड के इन मशहूर वाद्य यंत्रों की धुन,पढ़ें खास रिपोर्ट

भूतिया जगह, भूतिया खंडहर की भूतिया कहानियां तो आप सबने बहुत सुनी होगी उत्तराखंड में एक ऐसा गांव है जिसे लोग भूतिया गांव कहते हैं, पूरी दुनिया में कई रहस्य मौजूद है लेकिन ये रहस्य आज भी अनसुलझे है, अनसुलझे रहस्य में शामिल, उसी कहानी में एक कहानी चंपावत जिले के स्वाला गांव की जिसे भूतिया गांव कहा जाता है, उत्तराखंड का ये गांव अब भूतों के अड्डे के रुप में जाना जाता है जिसके बारे में आज हम आगे आपको बताएंगे.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड का चोपता है मिनी स्विट्ज़रलैंड, घूमने का प्लान है तो पढ़िए ये खबर।

चंपावत जिले के स्वाला गांव (Swala Village in Champawat) के बारे में जब भी बात आती है वहां के लोग इस बात का जिक्र जरूर करते हैं, जो आज के युग में सुनने में भले ही अजीब लगते हों लेकिन क्षेत्र के लोग इस बात को सची घटना बताते हैं,  गांव से पलायन कर चुके ग्रामीणों का तो यही कहना है कि अब उन्हें इस गांव में नहीं रहना.

यह भी पढ़ें: उत्तराखँड के वो पारंपरिक व्यंजन जिन्हें खाकर आप उंगलियां चाटने पर हो जाएंगे मजबूर

गांव के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि 1952 में 10 से 12 पीएसी जवानों से भरी एक मिनी बस गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जवानों ने ग्रामीणों से मदद की पुकार लगाई, उनकी पुकार सुन ग्रामीण वहां पहुंचे लेकिन उनकी मदद करने के बजाए उनका सामान लूटकर चले गए, जवान मदद के लिए चिल्लाते रहे लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की, इलाज न मिल पाने से जवानों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया उस वक्त गांव में 20 से 25 परिवार रहते थे, कहा जाता है कि उसके बाद गांव में अजीबोगरीब घटनाएं हुई, इसके बाद अफवाह फैली कि उन सैनिकों के भूत आ गए और फिर इस अफवाह ने गांव को खाली करा दिया.

यह भी पढ़ें: जानिए भगवान शिव और पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर से जुड़ी खास मान्यतायें

यहीं से गांव के वीरान होने की कहानी शुरू हो गई है, तब से लेकर अब तक गांव आज तक नहीं बसा, डर के चलते स्वाला गांव के लोग इसे छोड़कर चले गए हैं, आसपास के लोग अब इसे भूतिया गांव के नाम से जानने लगे हैं, जिस जगह से पीएसी के जवानों का गाड़ी गिरी थी, वहां इन जवानों की आत्मा की शांति के लिए नव दुर्गा देवी का मंदिर स्थापित कर दिया गया था, जहां हर आने और जाने वाली गाड़ी जरूर रुकती है.

उत्तराखंड फिल्म एवं संगीत जगत की सभी ख़बरों को विस्तार से देखने के लिए हिलीवुड न्यूज़ को यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें। 

Exit mobile version