पहाड़ी जीवन के मर्म को दिखाने में सफल रही बोल दियां ऊंमा शॉर्ट फिल्म।

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पहाड़ी जीवन के मर्म को दिखाने में सफल रही बोल दियां ऊंमा शॉर्ट फिल्म।

उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री में अपनी बोली भाषा पर फिल्मों के निर्माण को लेकर निर्माता अब इतने गंभीर नहीं हैं. लेकिन गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने इसे गंभीरता लेते हुए पालयन, पहाड़ के मर्म जीवन पर आधारित (Garhwali Short Film) शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा (BOL DIYAAN UNMA) का निर्माण किया जो उनके ऑफिसियल यूट्यूब चैनल से रिलीज हो गई है. 

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बोल दियां ऊंमा (BOL DIYAAN UNMA) फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने काफी प्यार दिया औऱ पूरी फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे,लेकिन अब उनका इंतजार खत्म हो गया है. बीते बुधवार को शॉर्ट फिल्म रिलीज हो गई. गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जो पिछले कई वर्षों से अपनी लोकसंस्कृति के लिए समर्पित है. और अपने गीतों से कई बार पहाड़ के इस दर्द को आवाज दे चुके हैं लेकिन अब इस शॉर्ट फिल्म से और भी अच्छे से सन्देश और जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं.

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बोल दियां ऊंमा फिल्म में राजेश नौगाई औऱ अंजलि नेगी देवर,भाभी के किरदार में नजर आए. दोनों कलाकारों ने अपने संवादों को बड़े भावुक अंदाज में स्क्रीन पर प्ले किए हैं. इसकी स्टोरी बेहद सरल औऱ मर्म है. जिसमें राजेश नौगाई कहते हुए नजर आते हैं कि आज मेरी छुट्टी का आखिरी दिन है और बस भी आखिरी ही है, तभी पीछे-पीछे अंजलि नेगी की आवाज आती है ,देवर से अपने पति के लिए (जो कि दिल्ली में रहता है) घर से समाना भेजती है. साथ ही अपने दर्द को बंया करते हुए कहती है पिछले 2 सालोें से घर टपकने लगा यही हाल रहा तो इस बरसात घर टूट कर खंडहर हो जाएगा. (बोल दियां ऊंमा) यानी यह संदेश अपने भाई तक पहुंचा देना, देवर भाभी के रिश्ते को आदर सम्मान का माना जाता है. जो इस फिल्म में देखने को मिला, इसके अलावा हर स्त्री का मन में एक भाव जरूर होता है कि घर की परेशानियों के चलते कहीं उसका पति जो शहर में नौकरी कर रहा है उसे परेशानी न हो. इसके लिए जैसा फिल्म में दिखाया गया है कि भाभी कहने के लिए तो सब कुछ कह देती है लेकिन देवर को जाने से पहले अपनी कसम देकर सभी बातें बताने को मना कर देती है.

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शॉर्ट फिल्म सभी उत्तराखंडियों को पलायन विषय की गंभीरता को समझाने में काफी हद तक सफल हो गई है. वल्लभ डोभाल द्वारा रचित कहानी को स्क्रीन के लिए मिनाक्षी नेगी ने अनुकृत किया है, फिल्म का जबरदस्त निर्देशन कविलास नेगी द्वारा किया गया है. फिल्माकंन विजय तोमर औऱ संपादन का काम शुभम कैंतुरा ने किया है. फिल्म में उत्तराखंड के ग्रामीण परिवेश को भाली-भांती फिल्माया गया है. यह फिल्म दिल को छूने वाली है. दर्शक लगातार इस फिल्म को पसंद कर रहे हैं.

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बोल दियां ऊंमा शार्ट फिल्म का आनंद लीजिए।

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